
कोलकाता : (Kolkata) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को दावा किया कि राज्य की जनता इस बार ‘कमल’ चिन्ह वाली सरकार को सत्ता में लाने के लिए तैयार है।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, उनकी पार्टी का आत्मविश्वास लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल की जनता ने पिछले 15 वर्षों में भय और दबाव की राजनीति देखी है, इसलिए अब लोग बदलाव चाहते हैं। रेखा गुप्ता ने कहा, “इस बार बंगाल में कमल चिन्ह (Lotus symbol) की सरकार बनने जा रही है। चार मई को जब परिणाम आएंगे तो ऐसा लगेगा जैसे नया सूर्योदय हुआ है, जहां सभी का सम्मान होगा।”
उन्होंने राज्य की मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल कई वर्षों से कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा है। खासतौर पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उन्होंने चिंता जताई और कहा कि राज्य में भय का माहौल है। उन्होंने कहा, “महिलाएं और बेटियां किस तरह जीवन जी रही हैं, यह बड़ा सवाल है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) पर गुंडाराज के आरोप लगते रहे हैं। महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करतीं। आरजी कर जैसी घटनाएं दिखाती हैं कि महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद स्थिति संतोषजनक नहीं है।”
दिल्ली की मुख्यमंत्री (Delhi Chief Minister) ने राज्य में भ्रष्टाचार के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि रोजगार, सरकारी नौकरी या अन्य सरकारी कार्यों में ‘कट मनी’ के बिना काम आगे नहीं बढ़ता। उनके मुताबिक किसान भुगतान न मिलने से परेशान हैं, युवा बेरोजगारी से जूझ रहे हैं और महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रही हैं। रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें दूसरों पर प्रतिक्रिया देने के बजाय अपने चुनाव प्रचार पर ध्यान देना चाहिए और जनता की आवाज सुननी चाहिए।
इस बीच, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) ने भरोसा दिलाया कि पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग पूरी तैयारी कर रहा है। पश्चिम बंगाल में इस बार 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान होगा। पहला चरण 23 अप्रैल को और दूसरा चरण 29 अप्रैल को संपन्न होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। अब राज्य की राजनीति में सभी की नजरें इन चुनावों के परिणाम पर टिकी हैं।


