
मुंबई : (Mumbai) पश्चिम एशिया संकट के बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) (Reserve Bank of India) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27(current fiscal year, 2026-27) में खुदरा महंगाई दर 4.6 फीसदी पर रहने का अनुमान जताया है। यह रिजर्व बैंक के संतोषजनक दायरे के अंदर हैं। हालांकि, सरकार ने केंद्रीय बैंक को मुद्रास्फीति को दो फीसदी घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य दिया है।
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा (RBI Governor Sanjay Malhotra) ने बुधवार को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) (bi-monthly Monetary Policy Committee) की समीक्षा बैठक के बाद कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट से पहले भारत के वृहद आर्थिक बुनियादी तत्व मजबूत दिख रहे थे और आर्थिक वृद्धि दर बेहतर एवं महंगाई कम रहने का आकलन किया जा रहा था। हालांकि, पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद स्थिति बदल गई है। उन्होंने कहा कि अप्रैल-जून की पहली तिमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर चार प्रतिशत रहने का अनुमान है। वहीं, दूसरी तिमाही में इसके 4.4 फीसदी, तीसरी तिमाही में 5.2 फीसदी और चौथी तिमाही में 4.7 फीसदी रहने का अनुमान है।
आरबीआई के गवर्नर ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने समीक्षा में पाया कि पिछली नीतिगत बैठक के बाद से भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं काफी बढ़ गई हैं। कुल मिलाकर महंगाई दर नियंत्रण में है और लक्ष्य से नीचे है। हालांकि, महंगाई के परिदृश्य के ऊपर जाने का जोखिम बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि इसका कारण ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव और मौसम में बदलाव है, जिसकी वजह से खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
संजय मल्होत्रा ने साथ ही कहा कि अर्थव्यवस्था को आपूर्ति में झटके का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बदलते हालात आर्थिक वृद्धि तथा महंगाई के बदलते दृष्टिकोण पर नजर रखना समझदारी होगी। इसी को देखते हुए एमपीसी ने अपनी समीक्षा में रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर ही बनाए रखने का फैसला किया है। खुदरा महंगाई दर फरवरी में बढ़कर 3.21 फीसदी हो गई थी। फरवरी महीने के महंगाई के आंकड़े नई उपभोक्ता मूल्य श्रृंखला पर आधारित थे, जिसका आधार वर्ष 2024 है।


