
जिनेवा : (Geneva) ईरान की एविन जेल पर इजराइली हमला युद्ध अपराध: संयुक्त राष्ट्र जांच प्रमुख संयुक्त राष्ट्र की एक स्वतंत्र जांच टीम ने कहा है कि 2025 में ईरान की कुख्यात एविन जेल पर किया गया इजराइल का हवाई हमला युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकता है। जांच प्रमुख ने साथ ही चेतावनी दी कि हालिया अमेरिका-इजराइल हमलों (US-Israeli attacks) के बाद ईरान में आंतरिक दमन और बढ़ सकता है।
सारा हुसैन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UN Human Rights Council, Sara Hossain) में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि इजराइल ने 2025 में एविन जेल पर हमला कर एक नागरिक संरचना को निशाना बनाया, जो युद्ध अपराध माना जा सकता है।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार जून 2025 में तेहरान स्थित एविन जेल पर हुए इस हवाई हमले में 70 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। जांच रिपोर्ट के मुताबिक मरने वालों की संख्या करीब 80 थी, जिनमें एक बच्चा और आठ महिलाएं भी शामिल थीं। यह निष्कर्ष पीड़ितों और प्रत्यक्षदर्शियों के साक्षात्कार, सैटेलाइट तस्वीरों और अन्य दस्तावेजों के आधार पर निकाला गया है।
एविन जेल (Evin Prison) को लंबे समय से राजनीतिक बंदियों को रखने के लिए जाना जाता है। हालिया अमेरिका-इजराइल हमलों के दौरान भी इस जेल को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं, जिससे वहां बंद कैदियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। बताया गया है कि जेल में एक ब्रिटिश दंपती समेत कई विदेशी नागरिक भी बंद हैं।
संयुक्त राष्ट्र की एक अन्य मानवाधिकार विशेषज्ञ माई सातो ने भी कैदियों की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद गिरफ्तार किए गए कई लोगों के परिवार अपने रिश्तेदारों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं और जेलों में भोजन व दवाओं की कमी की खबरें मिल रही हैं।
उधर संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अली बहरीन (Ali Bahraini, Iran’s Ambassador) ने अमेरिका-इजराइल हमलों की निंदा करने की मांग की। उनका कहना है कि इन हमलों में अब तक ईरान में 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
इस बीच इजराइल ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से दूरी बना ली है और जांच से जुड़े सवालों पर उसकी ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में जारी सैन्य कार्रवाई के कारण नागरिकों की सुरक्षा और मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं।


