
नई दिल्ली : (New Delhi) राऊज एवेन्यू सेशंस कोर्ट (Rouse Avenue Sessions Court) अब कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ 1980 में वोटर लिस्ट में कथित रुप से नाम जुड़वाने के मामले में अगली सुनवाई 7 फरवरी को करेगा। स्पेशल जज विशाल गोगने (Special Judge Vishal Gogne) ने आज उस याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए सोनिया गांधी को समय दे दिया है, जिसमें एफआईआर दर्ज करने की मांग करने वाली याचिका मजिस्ट्रेट कोर्ट (Magistrate Court) से खारिज करने के आदेश को चुनौती दी गई थी।
सुनवाई के दौरान मंगलवार काे सोनिया गांधी के वकील ने याचिका का जवाब देने के लिए समय देने की मांग की। उन्होंने कहा कि दस्तावेज काफी पुराने हैं। उसके बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 7 फरवरी को करने का आदेश दिया। 9 दिसंबर, 2025 को कोर्ट ने सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था।
यह याचिका वकील विकास त्रिपाठी (advocate Vikas Tripathi) ने दायर की है। इसके पहले 11 सितंबर को एडिशनल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने याचिका खारिज कर दी थी। याचिका में कहा गया है कि वोटर लिस्ट में सोनिया गांधी का नाम 1980 में ही जुड़ गया था, जबकि वो 1983 में भारत की नागरिक बनीं। याचिका में कहा गया है कि सोनिया गांधी का नाम दिल्ली के नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के वोटर लिस्ट में 1980 में ही जुड़ गया था, जबकि वे उस समय भारत की नागरिक भी नहीं थीं। बीच में सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट से 1982 में हटाया गया और बाद में 1983 में फिर नाम जोड़ा गया। सोनिया गांधी भारत की नागरिक 1983 में बनीं।
याचिका में कहा गया है कि सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन भी अप्रैल 1983 में दिया था। याचिका में कहा गया है कि जब सोनिया गांधी 1983 में भारतीय नागरिक (Sonia Gandhi became an Indian citizen in 1983) बनीं, तो 1980 में वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए कुछ फर्जी दस्तावेज दिए गए होंगे, जो एक संज्ञेय अपराध है। ऐसे में कोर्ट सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया जाए। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस मामले पर न तो सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया था और न ही दिल्ली पुलिस को।


