प्रशासन पर लगाया पक्षपात का आरोप
रायबरेली : (Rae Bareli) दिल्ली के पूर्व विधि एवं न्याय मंत्री सोमनाथ भारती (Former Delhi Law and Justice Minister Somnath Bharti) गुरुवार को एमपीएमएलए कोर्ट के समक्ष पेश हुए। सुनवाई के बाद 24 नवम्बर को अगली तारीख नियत की गई है। मुकदमे को लेकर मीडिया से उन्होंने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया। पेशी के दौरान कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
रायबरेली जिला न्यायालय परिसर में डॉ. विवेक कुमार की कोर्ट (Somnath Bharti appeared in Dr. Vivek Kumar’s court) में सोमनाथ भारती पेश हुए,उनके अधिवक्ता ने बहस के दौरान कहा कि दिल्ली से रायबरेली हर पेशी पर पहुंच न पाने के कारण सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रत्येक पेशी पर भौतिक उपस्थिति से छूट देते हुए वीडियो कान्फ्रेंसिंग से हाजिर होने के आदेश दिए गए हैं। जानबूझकर गलती नहीं की है।
आरोपित के अधिवक्ता ने आश्वस्त किया कि वह अनुपस्थित नहीं होंगे तथा चार्ज के समय भौतिक उपस्थित रहेंगे । हालांकि शासकीय अधिवक्ता संदीप सिंह (government advocate Sandeep Singh) ने विरोध किया। पक्षकारों को सुनने के बाद पीठासीन न्यायिक अधिकारी डाॅ. विवेक कुमार (presiding judicial officer, Dr. Vivek Kumar) ने एनबीडब्ल्यू एवं 82 का आदेश रिकाल करते हुए 24 नवंबर को आरोप पर सुनवाई के आदेश दिए । उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 में विवादित टिप्पणी के एक मामले में उनके ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज किया गया था। अदालत से बाहर मीडिया से बातचीत में भारती ने कहा कि उस समय उन पर स्याही फेंकी गई थी, लेकिन पुलिस ने उस व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। उल्टा, हरचंदपुर से तत्कालीन विधायक राकेश प्रताप सिंह (MLA from Harchandpur, Rakesh Pratap Singh) ने उसे ₹51,000 का इनाम दिया था। उन्होंने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह घटना प्रशासन और सरकार की पक्षपातपूर्ण कार्यशैली को उजागर करती है।
सोमनाथ भारती (Somnath Bharti) ने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा राजनीतिक द्वेष से प्रेरित था और वे अदालत से न्याय की उम्मीद रखते हैं। गौरतलब है कि 11 जनवरी 2021 को रायबरेली जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान भारती ने विवादित टिप्पणी की थी।
इस टिप्पणी से विवाद खड़ा हो गया था, जिसके बाद शहर कोतवाली में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पहले पेश न होने पर अदालत ने गैर ज़मानती वारंट जारी किया था, जिसके बाद आज वे पेश हुए। मामला वर्तमान में जिला एवं सत्र न्यायालय रायबरेली में विचाराधीन है।


