वॉशिंगटन : (Washington) यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका रूस (The European Union (EU) and the US) के खिलाफ नए प्रतिबंधों पर समन्वय की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की (President Donald Trump and Russian President Vladimir Putin) अलास्का शिखर वार्ता के तीन सप्ताह बाद भी यूक्रेन पर रूसी हमले जारी हैं।
यूरोपीय संघ के शीर्ष प्रतिबंध अधिकारी डेविड ओ’सुलिवन (David O’Sullivan) सोमवार को विशेषज्ञों की टीम के साथ वॉशिंगटन पहुंचे। उनका मकसद अमेरिका के साथ मिलकर पहली बार एक साझा पैकेज तैयार करना है। ट्रंप के फिर से सत्ता में आने के बाद यह पहला अवसर होगा जब ट्रांसअटलांटिक स्तर पर इस तरह का सहयोग देखने को मिलेगा।
रविवार को कीव में अब तक के सबसे बड़े हवाई हमले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि वे रूस के खिलाफ “प्रतिबंधों के दूसरे चरण” (“second phase of sanctions”) पर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं। यह अब तक का सबसे स्पष्ट बयान माना जा रहा है। हालांकि, अब तक अमेरिका ने यूरोप, ब्रिटेन और कनाडा के साथ मिलकर कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों पर लगे मूल्य-सीमा (प्राइस कैप) को और घटाने के प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया है। वहीं, ट्रंप प्रशासन ने भारत से आयात होने वाले सामान पर भारी शुल्क बढ़ा दिए हैं, यह कहते हुए कि भारत रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखे हुए है।
ईयू परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने (EU Council President Antonio Costa) कहा कि यूरोपीय देश अमेरिका के साथ मिलकर नए प्रतिबंधों को आकार देने की कोशिश कर रहे हैं। ऊर्जा बाजार पर इसका सीधा असर दिखाई देने लगा है- सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में एक डॉलर से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।


