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Bilaspur : स्कूल परिसर पर 3 साल की बच्ची की मौत के मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने शासन को 2 लाख रुपये मुआवजा देने का दिया आदेश

बिलासपुर : (Bilaspur) छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (Chhattisgarh High Court) में बिलासपुर में एक स्कूल परिसर में हुए हादसे में 3 साल की बच्ची मुस्कान की मौत के मामले (death of 3-year-old girl Muskan in an accident in a school premises in Bilaspur)में परिजन को सरकार की तरफ से 2 लाख रुपये मुआवजा (Rs 2 lakh compensation to the family) दिए जाने का आदेश दिया है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायाधीश विभु दत्त गुरु की बैंच (Chief Justice Ramesh Kumar Sinha and Justice Vibhu Dutt Guru of the High Court) में मंगलवार को सुनवाई हुई। जिसमें शासन का पक्ष रखते हुए महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन भारत में बताया कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपित डीजे संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से परिजन को दुर्भाग्यववश हुई इस घटना के लिए ₹50000 की राशि दी गई है। इस तरह की घटना दोबारा ना हो इसके लिए कलेक्टर ने दिशानिर्देश भी जारी किया है। जिस पर मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने घटना की गंभीरता को देखते हुए हुए शासन को परिवार की इस मानवीय क्षति के लिए मदद राशि ₹2 लाख और देने का आदेश सुनाया है।

दरअसल 14 अगस्त की सुबह करीब 11:15 बजे तीन साल की मुस्कान महिलांगे तालापारा घोड़ादाना स्कूल परिसर में बने आंगनबाड़ी के आसपास में बच्चों के साथ खेल रही थी। तभी डीजे संचालक रोहित देवांगन (operator Rohit Devangan) द्वारा लापरवाही से दीवार पर टिकाकर रखे गए लोहे के पाइपों में से एक अचानक उसके सिर पर गिर गया। गंभीर चोट लगने पर उसे जिला अस्पताल और फिर सिम्स रेफर किया (referred to the district hospital and then to SIMS) गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस जांच में स्पष्ट हुआ कि यह हादसा पूरी तरह लापरवाही से हुआ है। पुलिस ने आरोपित डीजे संचालक रोहित देवांगन और एक अन्य के खिलाफ बीएनएस की धारा 106, 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया है। रोहित स्कूल चौकीदार का पोता है और परिसर के भीतर ही सामान रखता था। इस मामले को स्वत: संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने सुनवाई शुरू की। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने सख्त लहजे में पूछा था कि आंगनबाड़ी परिसर में डीजे का सामान कैसे रखा गया..? अधिवक्ताओं ने बताया कि एक आंगनबाड़ी कर्मचारी का रिश्तेदार डीजे संचालक है, उसी का सामान वहां रखा गया था। इस पर कोर्ट ने कहा कि तीन साल की बच्ची की मौत बेहद गंभीर मामला है। न्यायालय ने मृतक बच्ची के परिवार को अब तक क्या मुआवजा और सहायता दी गई के बारे में पूछा था। वहीं न्यायालय ने कहा था कि इस मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। कलेक्टर से मांगी गई रिपोर्ट के साथ-साथ शासन को पीड़ित परिवार की सहायता दिए जाने पर शपथ पत्र में जवाब भी मांगा था, जिसे मंगलवार को पेश किया गया।

मंगलवार को हुई सुनवाई में न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह मृतक बच्चे के माता-पिता को आज से एक महीने के भीतर पहले से भुगतान की गई राशि के अतिरिक्त 2,00,000/- रुपये का अतिरिक्त मुआवजा स्वीकृत और वितरित करे। जिला मजिस्ट्रेट, बिलासपुर यह सुनिश्चित करेंगे कि अतिरिक्त राशि 2,00,000/- की राशि मृतक नाबालिग लड़की के माता-पिता को वितरित की जाती है, जैसा कि ऊपर आदेश दिया गया है और वह इस संबंध में इस न्यायालय के समक्ष एक हलफनामा/अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल करेगा। वहीं न्यायालय ने कहा यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ सरकार और सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग, सभी जिला अधिकारियों को स्कूलों और आंगनबाड़ी परिसरों में और उसके आसपास कड़ी निगरानी रखने के लिए उचित निर्देश जारी करने के लिए स्वतंत्र होंगे, ताकि उनके परिसर में कोई खतरनाक सामग्री या अनधिकृत वस्तुएँ संग्रहित न हों। जो वहाँ काम करने वाले कर्मचारियों या बच्चों के जीवन के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। समय-समय पर निरीक्षण भी किए जा सकते हैं और जिम्मेदारी तय की जा सकती है।भविष्य में किसी भी चूक की स्थिति में दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। इस मामले को आगे की निगरानी के लिए 09 अक्टूबर 2025 को पुनः सूचीबद्ध (re-listed on 09 October 2025 for further monitoring) किया है।

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