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New Delhi : मनी लांड्रिंग मामले में अमानतुल्लाह खान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

नई दिल्ली : (New Delhi) हाई कोर्ट ने दिल्ली वक्फ बोर्ड की भर्ती से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान (Aam Aadmi Party MLA Amanatullah Khan) की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने का आदेश दिया। बेंच ने 4 मार्च को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सुनवाई के दौरान ईडी ने अमानतुल्लाह खान की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अमानतुल्लाह खान को अगर अग्रिम जमानत दी गई तो वे जांच में सहयोग नहीं करेंगे। ईडी ने कहा था कि अमानतुल्लाह खान ने आपराधिक गतिविधियों से काफी संपत्ति अर्जित की औऱ अपने सहयोगियों के नाम पर अचल संपत्ति खरीदी है। ईडी ने कहा था कि छापे के दौरान कई दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य ऐसे मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि वो मनी लांड्रिंग के अपराध में लिप्त हैं। अमानतुल्लाह खान ने ट्रायल कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 1 मार्च को अमानतुल्लाह खान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उनकी ओर से पेश वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा था कि अमानतुल्लाह खान को मनी लांड्रिंग के मामले में ईडी की ओर से नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा था कि एक ही मामले में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। सीबीआई ने 23 नवंबर, 2016 को पहली एफआईआर दर्ज की थी। आरोप है कि अमानतुल्लाह खान को दिल्ली वक्फ बोर्ड का चेयरमैन गलत तरीके से नियुक्त किया गया। सीबीआई ने इस मामले को ये कहते हुए बंद कर दिया ये प्रशासनिक गड़बड़ी है। गुरुस्वामी ने कहा कि ये निर्विवाद कानून है कि एक ही मामले के लिए दो एफआईआर दर्ज नहीं किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा था कि दोनों ही मामलों में जमानत के आदेश में साफ कहा गया है कि राजकोष को कोई नुकसान नहीं हुआ।

राऊज एवेन्यू कोर्ट ने वक्फ बोर्ड से जुड़े मनी लांड्रिंग के मामले में ईडी की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया है। ईडी ने 9 जनवरी को चार्जशीट दाखिल की थी। करीब पांच हजार पेज की चार्जशीट में ईडी ने जावेद इमाम सिद्दीकी, दाऊद नासिर, कौसर इमाम सिद्दीकी और जीशान हैदर को आरोपित बनाया है। ईडी ने पार्टनरशिप फर्म स्काई पावर को भी आरोपित बनाया है।

इस मामले में पहले सीबीआई ने 23 नवंबर, 2016 को आप विधायक अमानतुल्लाह खान समेत 11 आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जांच के बाद सीबीआई ने 21 अगस्त, 2022 को चार्जशीट दाखिल की थी। सीबीआई के मुताबिक दिल्ली वक्फ बोर्ड के सीईओ और संविदा पर दूसरी नियुक्तियों में गड़बड़ियां की गईं। सीबीआई की चार्जशीट में कहा गया है कि इन नियुक्तियों के लिए अमानतुल्लाह खान ने महबूब आलम और दूसरे आरोपितों के साथ साजिश रची, जिन्हें वक्फ बोर्ड में विभिन्न पदों पर नियुक्त किया गया था। चार्जशीट के मुताबिक इन नियुक्तियों में मनमानी की गई और अमानतुल्लाह खान और महबूब आलम ने अपने पद का दुरुपयोग किया।

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