कहा, याची अन्य योग्यताओं को पूरा करता है तो प्राचार्य बनने की करें सिफारिश
प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याची डॉ. एस. कुमार को एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य पद से हटाने के उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के आदेश को रद्द कर दिया है।
साथ ही आयोग को निर्देश दिया है कि अगर याची नियमों के तहत अन्य योग्यताओं को रखता हो तो प्राचार्य बनाने के लिए सिफारिश करें। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने डॉ. एस. कुमार की याचिका को स्वीकार करते हुए और ऐसे ही मामले में डॉ. जितेंद्र सिंह कुशवाहा की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। याचिका जौनपुर जिले की थी।
कोर्ट ने कहा कि याची के चयन को रद्द करने का आयोग के पास कोई आधार नहीं है। इस वजह से उसके आदेश को बरकरार नहीं रखा जा सकता है। आयोग ने याची के प्राचार्य पद पर चयन को एक गुप्त आदेश के माध्यम से रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आयोग ने शैक्षिक अनुभवों के लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के 13 दिसम्बर 2018 के दिशा निर्देशों पर ध्यान नहीं दिया और इस सम्बंध में यूपी सरकार के सक्षम अधिकारी द्वारा 10 जनवरी 2022 और 30 मई 2022 के जारी पत्रों को नजरअंदाज कर दिया। इस वजह से उसके आदेश को बरकरार रखा नहीं जा सकता है।
मामले में याची डॉ. एस कुमार का चयन एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य के पद पर हुआ था लेकिन आयोग ने उसे अपने 10 अगस्त 2022 के आदेश के तहत रद्द कर दिया था। याची ने आयोग के इस आदेश को चुनौती दी थी। याची की ओर से कहा गया कि उसके पास प्राचार्य बनने के लिए आठ साल का अर्ह शैक्षिक अनुभव है। वह चार साल तक एसोसिएट प्रोफेसर और चार साल तक प्रोफेसर रहा है। एमसीआई ने भी दोनों पदों के शैक्षिक अनुभवों को बराबर माना है। साथ ही यूपी सरकार के सक्षम अधिकारी ने भी इस बात को स्पष्ट किया है। जबकि, आयोग के अधिवक्ता की ओर से इसका विरोध किया गया। कहा कि याची की प्रोफेसर के पद का शैक्षिक अनुभव नहीं है। एसोसिएट प्रोफेसर के शैक्षिक अनुभव को प्रोफेसर के शैक्षिक अनुभव को जोड़ा नहीं जा सकता है। इस वजह से उन्हें पद से हटाया जाना सही है।


