नाबालिग बच्ची की अभिरक्षा का मामला
प्रयागराज : सात साल की उम्र तक पालने वाली मां ने बच्ची की अभिरक्षा सौंपने की इलाहाबाद हाई कोर्ट से गुहार लगाई है। बच्ची जब एक दिन की थी तो किन्नरों ने उसे लाकर पालने के लिए दिया था और जब बच्ची सात की हुई तो वे उठा ले गए। शिकायत पर पुलिस ने लड़की बरामद की और बाल कल्याण समिति आगरा ने यशोदा की तरह पालने वाली मां को सौंप दिया। किंतु कुछ समय बाद लड़की बाल संरक्षण गृह में दे दी गई। जिस पर मां मीना ने हाई कोर्ट की शरण ली।
याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एसडी सिंह तथा न्यायमूर्ति शिवशंकर प्रसाद की खंडपीठ ने सरकारी वकील से जानकारी मांगी। याची का कहना है कि 28 नवंबर 14 को किन्नरों ने उसे एक दिन की कन्या लाकर दी थी और लड़की के सात साल की होने पर 21 नवंबर 21 को वे उठाकर ले गये। पुलिस ने लड़की बरामद की और 13 दिसंबर 21 को बाल संरक्षण गृह भेज दिया। याची ने बेटी की अभिरक्षा के लिए शिकायत की। लड़की ने भी मां याची के साथ रहने की इच्छा जताई। कमेटी ने 21 दिसंबर 21 को बच्ची को पालने वाली मां के हवाले कर दिया।
छह मार्च 23 को कमेटी ने याची के केयरटेकर के दावे को नकार दिया और कहा कि बच्चे के हित में नहीं है। हाई कोर्ट ने इसे सही नहीं माना और सरकार से जानकारी मांगी। सरकार की तरफ से बताया गया कि बच्ची के माता-पिता का पता नहीं चला है। अन्य किसी ने दावा नहीं किया है। एक नितिन गर्ग ने 2015 में अपनी बच्ची के घर से गायब होने की एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने इस बच्ची को अपना बताते हुए डीएनए टेस्ट की मांग की है, जिसकी कार्रवाई की गई है।
हाई कोर्ट ने नितिन गर्ग को याचिका में पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी कर पक्ष रखने को कहा है और पुलिस से उम्मीद जताई है कि अगली तिथि तक वह डीएनए जांच करा लेगी। कोर्ट ने जिलाधिकारी आगरा को आदेश का पालन करने को कहा है। साथ ही याची को जिला प्रोबेशन अधिकारी की मौजूदगी में समय-समय पर बच्ची से मुलाकात करने की अनुमति देने का निर्देश दिया है। याचिका की सुनवाई 8 दिसम्बर को होगी।


