नौसेना और वायु सेना ने रक्षा मंत्रालय को भेजे 1.4 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव
डीएसी की 30 नवंबर को होने वाली बैठक में प्रारंभिक मंजूरी मिलने की संभावना
नई दिल्ली: (New Delhi) भारत सरकार एक और विमानवाहक पोत, 97 तेजस और 156 एलसीएच प्रचंड (97 Tejas and 156 LCH Prachanda) के लिए प्रारंभिक मंजूरी देने को तैयार है। इन तीन बड़ी रक्षा परियोजनाओं को रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की 30 नवंबर को होने वाली बैठक में आवश्यकता को स्वीकार (Acceptance of Requirement) (एओएन) करने की संभावना है। नौसेना और वायु सेना ने इन परियोजनाओं के लिए 1.4 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव पहले ही रक्षा मंत्रालय को भेज दिए हैं।
भारतीय नौसेना के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत ने पूर्ण परिचालन क्षमता हासिल कर ली है। अब युद्ध मोड में तैनात होने के लिए पूरी तरह से तैयार है। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति के बीच इस युद्धपोत की तैनाती भारत की ताकत बढ़ाएगी। ‘विक्रांत’ को नौसेना में शामिल किये जाने के बाद से ही नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ‘मेक इन इंडिया’ के तहत इस दूसरे विमानवाहक पोत की जरूरत बता रहे थे। इसी के मद्देनजर नौसेना ने ‘आईएसी-2’ की मेगा डील को मंजूरी देने के लिए केंद्र सरकार के पास प्रस्ताव भेज रखा है। भारत के लिए इस तरह के तीन विमानवाहक पोतों की जरूरत बताई जा रही है।
भारतीय वायु सेना को 4.5 पीढ़ी का पहला लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) एमके-1ए फाइटर जेट अगले साल फरवरी-मार्च तक मिल जाएगा। इसी सौदे का पहला ट्रेनर विमान वायु सेना को दस दिन पहले 04 अक्टूबर को सौंपा जा चुका है। फरवरी, 2021 में किये गए सौदे के मुताबिक एलसीए तेजस की आपूर्ति शुरू होने के बाद अतिरिक्त 97 विमानों के सौदे पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इसके लिए रक्षा खरीद बोर्ड ने पहले ही मंजूरी दे दी है। इस महीने के अंत में होने वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में इस बारे में फैसला लिया जाएगा। श्रीनगर स्थित स्वॉर्ड आर्म्स स्क्वाड्रन को तेजस एमके-1ए के लिए निर्धारित किया गया है।
दुनिया का पहला लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) ‘प्रचंड’ भारतीय सेना और वायु सेना के लिए नई ताकत बनकर उभरा है। पिछले माह 30 अक्टूबर को इस हेलीकॉप्टर से पहली बार 70 मिमी रॉकेट और 20 मिमी बुर्ज गन की दिन और रात के समय फायरिंग की गई। आर्मी एविएशन के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल एके सूरी ने एलसीएच स्क्वाड्रन की आयुध क्षमता के वास्तविक समय सत्यापन के लिए तीन हमलावर हेलीकॉप्टरों से गोलीबारी देखी। सेना को 05 और वायु सेना को 10 हेलीकॉप्टर मिल चुके हैं, जिनका इस्तेमाल दोनों सेनाएं कर रही हैं।
इन हेलीकॉप्टरों की अटैक क्षमता देखने के बाद सेना और वायु सेना ने 156 और एलसीएच ‘प्रचंड’ की जरूरत जताई है। दोनों सेनाओं के लिए यह संयुक्त अधिग्रहण प्रस्ताव सरकार को भेज दिया गया है, जिसे जल्द ही मंजूरी मिलने की संभावना है। इन 156 हेलीकॉप्टरों में से 66 भारतीय वायु सेना को और 90 भारतीय सेना को मिलेंगे। सेना को एलसीएच ‘प्रचंड’ मिलने के बाद अलग-अलग पहाड़ी इलाकों में सात यूनिट्स बनाई जाएंगी। एचएएल को ऑर्डर दिए जाने के बाद दोनों सेनाओं को हर साल 25 एलसीएच प्रचंड अटैक हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति की जाएगी।


