जयपुर : राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस एमएम श्रीवास्तव ने कहा कि आगामी समय में हमारा देश और समाज कैसा होगा यह देश के बच्चों की परवरिश पर निर्भर करेगा। देश के उज्जवल भविष्य के लिए हमें समाज के बच्चों की परवरिश बेहतर और गुणवत्ता पूर्ण करनी होगी। समाज के हर बच्चे के विकास के लिए उनके साथ पूर्ण संवेदनशील व अभिभावकता वाला व्यवहार करके ही उनके बेहतर भविष्य का निर्माण हो सकता है।
जस्टिस श्रीवास्तव ने यह विचार किशोर न्याय समिति बाल अधिकारिता विभाग एवं यूनिसेफ की ओर से विधि संघर्षरत बच्चेः रोकथाम, पुनर्स्थापनात्मक न्याय व विचलन और हिरासत के विकल्प विषय पर शनिवार को आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला में रखे। वहीं जस्टिस विजय विश्नोई ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2022-23 में विधि संघर्षरत बालकों के 5013 केस निस्तारित किए और बच्चों की जमानत के केवल 10 फीसदी केस ही लंबित हैं। जस्टिस इन्द्रजीत सिंह ने कहा कि नशे में फंसे हुए बालक आपराधिक प्रवृत्ति के शिकार हो जाते हैं और इसका निराकरण नशा मुक्ति ही है। कार्यशाला को संबोधित करते हुए जस्टिस शुभा मेहता ने कहा कि बच्चों को शारीरिक व मानसिक अपराध से बचाना जरूरी है। कार्यशाला में बाल अधिकारिता विभाग की सचिव आरुषि मलिक व यूनिसेफ की राजस्थान प्रमुख इसाबेल बाहम ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस दौरान यूनिसेफ की ओर से बनाये पोस्टर का विमोचन भी किया गया।


