वाराणसी : महिला महाविद्यालय बीएचयू के जूलॉजी विभाग विभाग में आयोजित पॉच दिवसीय कार्यशाला का समापन शनिवार को हुआ। कार्यशाला में प्रतिभागी छात्राओं को ताजे पानी के सीपियों से मोती पालन में शामिल विभिन्न चरणों के लिए प्रशिक्षित किया गया। नेट बैग तैयार करने, कृषि फार्म के तालाब से ताजे पानी के मसल्स का संग्रह, और सीप शरीर के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न प्रकार के नाभिकों का शल्य चिकित्सा प्रत्यारोपण भी सीखाया गया।
छात्राओं को तालाब में पोस्ट-संचालित मसल्स को छोड़ने और इसके प्रबंधन के उचित तरीकों के लिए भी प्रशिक्षित किया गया। जूलॉजी सेक्शन की प्रभारी प्रोफेसर सुनीता सिंह की मौजूदगी में अशोक मनावनी और उनकी टीम ने पूरे पॉच दिनों तक प्रतिभागियों को पूर्व-संचालित मसल्स से मोती की कटाई के लिए भी प्रशिक्षित किया। उन्हें मोती और शेल क्राफ्टिंग से भी परिचित कराया गया।
कार्यशाला में ही मोती पालन में मीठे पानी के मसल्स की देशी प्रजातियों के उपयोग को प्रोत्साहित किया गया। ‘मीठे पानी की पर्ल कल्चर में उद्यमिता विकास और अवसर’ (ईडीओएफपीसी) पर आधारित पांच दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता महिला महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. रीता सिंह ने की। बतौर मुख्य अतिथि उप-निदेशक मत्स्य पालन, वाराणसी, उत्तर प्रदेश डॉ. अनिल कुमार ने भी छात्राओं को आवश्यक जानकारी दी।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलसचिव प्रोफेसर अरुण कुमार सिंह रहे। आयोजन समिति के सदस्यों संयोजक प्रो सुनीता सिंह,सचिव करुणा सिंह, सचिव डॉ. गीता जे. गौतम और डॉ उषा कुमारी ने अतिथियों का स्वागत किया


