नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में आज बिलकिस बानो केस के दोषियों की समय से पहले रिहाई का याचिकाकर्ता की ओर से विरोध किया गया। जस्टिस बीवी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली बेंच इस मामले पर कल यानि 8 अगस्त को भी सुनवाई जारी रखेगी।
आज सुनवाई के दौरान बिलकिस बानो की ओर से पेश वकील शोभा गुप्ता ने कहा कि यह मामला अन्य मामलों से अलग है। उनके मामले में दोषी किसी भी राहत या नरमी के हकदार नहीं है। बिलकिस बानो के साथ जो हुआ वह कोई वो आम अपराध नहीं था। उस सदमे से वह अब तक उबर नहीं पाई हैं। जो अपराध हुआ उसका सदमा और फिर दोषियों को समय से पहले रिहा कर दिया जाना याचिकाकर्ता के लिए दोहरे सदमे जैसा है। 17 जुलाई को कोर्ट को बताया गया था कि सभी 11 दोषियों को नोटिस दिया जा चुका है।
सुनवाई के दौरान रिहा हुए कुछ लोगों ने 11 जुलाई को आरोप लगाया था कि बिना उन्हें नोटिस तामील किए याचिकाकर्ता बिलकिस की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को झूठी जानकारी दी गई है कि प्रक्रिया पूरी कर दी गई है। 18 अप्रैल को गुजरात सरकार ने रिहाई से जुड़ी फाइल दिखाने के आदेश का विरोध किया था। राज्य सरकार की दलील थी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर ही गैंगरेप के दोषियों की रिहाई हुई है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि आज बिलकिस का तो कल किसी और का हो सकता है। इसलिए आप दोषियों की रिहाई की वजह बताएं। कोर्ट ने कहा था कि ऐसे जघन्य मामलों में दोषियों की रिहाई समाज को प्रभावित करता है। इसलिए शक्तियों का इस्तेमाल जनहित में होना चाहिए। कोर्ट ने कहा था कि चूंकि केंद्र सरकार का फैसला राज्य सरकार को मानना है, इसका मतलब ये नहीं कि राज्य सरकार अपना दिमाग नहीं लगाएगी।
दिसंबर, 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो के दोषियों की रिहाई से जुड़े मामले में दायर बिलकिस की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी। बिल्किस बानो की पुनर्विचार याचिका में मांग की गई थी कि 13 मई 2022 के आदेश पर दोबारा विचार किया जाए। 13 मई, 2022 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि गैंगरेप के दोषियों की रिहाई में 1992 में बने नियम लागू होंगे। इसी आधार पर 11 दोषियों की रिहाई हुई है।


