धमतरी : आषाढ़ माह खत्म होने में अब सिर्फ एक दिन शेष है। तीन जुलाई को आषाढ़ माह की विदाई होने से पहले ग्रामीण अंचलों में ग्रामीण आधी रात गांवों के सीमा में सावनाही रेंगाकर सावन माह में होने वाली अनहोनी से गांवों को सुरक्षित करने में जुट गए है। बैगाओं से पूजा-अर्चना कराकर गांव को सुरक्षाकवच में बांध रहे हैं। सालों से चली आ रही यह परंपरा शुरू हो गई है, क्योंकि चार जुलाई से सावन माह की शुरुआत हो जाएगी।
आषाढ़ माह खत्म होने में अब सिर्फ एक दिन शेष है। तीन जुलाई को माह के अंतिम दिन है, जबकि अंचल में चार जुलाई से सावन माह की शुरुआत हो रही है। ऐसे में गांव के मुखिया व पदाधिकारी सावन माह के प्रवेश से पहले सावनाही रेंगाने की परंपरा गांवों में आधीरात एक या दो जुलाई से ग्रामीणों ने निभा ली है। जबकि कई गांवों में तीन जुलाई को इस परंपरा को निभाएंगे। ग्रामीण खोरबाहरा राम, जगत राम साहू आदि ने बताया कि गांवों के सियार (सीमा) पर पूजा-अर्चना कर गांव में शांति कायम रखने व लोगों के सेहतमंद रहने की कामना की गई है। वहीं अनहोनी न हो, बाहरी शक्तियों के प्रवेश पर रोक आदि के लिए टोटका करते हैं। इसके लिए गांवों में जिंदा मुर्गी, नींबू, बंदन आदि छोड़ कर परंपरा निभाए। ग्रामीण अंचलों में इस तरह के पूजा-अर्चना को ही सावनाही रेंगाने की परंपरा कहते हैं। यह परंपरा आषाढ़ माह के अंतिम सप्ताह में की जाती है। उल्लेखनीय है कि ग्रामीण अंचलों में सावन माह को अनहोनी वाला माह मानते हैं, ऐसे में ग्रामीण इस माह में सुरक्षित रहने कई उपाय करते हैं।
दीवारों पर बनेंगे गोबर की कई आकृति
सावन लगते ही गांव के ज्यादातर घरों की दीवारों पर गोबर से बनी विभिन्न आकृति देखने मिल जाएगी। वहीं घर की बाहरी दीवार पर गोबर से खिंची लकीरें बनाएंगे। ग्रामीण इसे सावनाही टोटका बताते हैं। वर्षों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा मानकर अब तक परंपरा निभा रहे हैं। इसके पीछे इनका उद्देश्य बाहरी दूषित (बुरी हवाओं) हवाओं से घर-परिवार का सुरक्षा देना है। सावन की शुरुआत से ही सावनाही के टोटके गांव घरों में देखे जाते हैं। सावन माह लगते ही ग्रामीण अंचलों में समय से पहले सन्नाटा पसर जाता है। लोग देर रात घरों से बाहर नहीं निकलते। स्वयं व परिवार को सुरक्षित रखने ग्रामीण तरह-तरह के टोटके करते रहते हैं।


