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Kanpur : वातावरण में पर्याप्त आर्द्रता परेशानी का सबब, बन रही उमस

कानपुर : चक्रवाती तूफान बिपरजॉय का असर कमजोर पड़ गया, लेकिन तेज बारिश होने से वातावरण में पर्याप्त आर्द्रता आ गई है। यही आर्द्रता उमस के लिए परेशानी का सबब बन गई है, जबकि आसमान में तेज धूप भी नहीं निकल रही और बादल छाये हुए हैं। इसके बावजूद उमस भरी गर्मी मई-जून की चिलचिलाती गर्मी से भी ज्यादा रुला रही है।

चन्द्रशेखर आजाद कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एस एन सुनील पाण्डेय ने शनिवार को बताया कि देश के अधिकतर राज्यों में भीषण गर्मी के बीच बारिश का सिलसिला जारी है, लेकिन मामूली बारिश से उमस इतनी बढ़ गई कि लोगों का हाल-बेहाल है। आसमान से सूरज नदारद है लेकिन गर्मी का कहर जारी है। शरीर पर चिप-चिपापन और पसीने से गीले कपड़े इन दिनों की आम परेशानी है। बढ़ती उमस यानी आर्द्रता सुबह से लेकर रात तक परेशानी का सबब बनी हुई है। इस दौरान तपती धरती पर पानी की कुछ बूंदें पड़ती है तो गर्म जमीन से भाप निकलती है। ये भाप वातावरण में नमी को बढ़ाती है। इस बारिश से तापमान में गिरावट तो आती है लेकिन ये मामूली गिरावट होती है, तो बारिश के बाद हमें बढ़ते तापमान के साथ नमी भी महसूस होती है, जिससे उसम भरी गर्मी झेलनी पड़ती है।

एक नजर में वेट बल्ब तापमान

मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि 32 डिग्री सेल्सियस का वेट बल्ब तापमान आमतौर पर अधिकतम होता है, जिसे मानव शरीर सहन कर सकता है और सामान्य बाहरी गतिविधियां कर सकता है। यह 55 डिग्री सेल्सियस के शुष्क तापमान के बराबर है। 35 डिग्री का वेट बल्ब रीडिंग जीवन के लिए खतरा है और इससे हीट स्ट्रोक और यहां तक कि मौत भी हो सकती है। कथित तौर पर भारत के कई हिस्सों में पहले से ही चरम गर्मी में अधिकतम सहनीय वेट बल्ब तापमान का अनुभव होता है। गीला बल्ब शब्द उस तरीके से आया है, जिसमें थर्मामीटर के अंत के चारों ओर गीले कपड़े का एक टुकड़ा लपेटकर माप लिया जाता है ताकि यह देखा जा सके कि कितना वाष्पीकरण तापमान को कम कर सकता है।

Mumbai : राजामौली ने की ‘धुरंधर 2’ की जमकर तारीफ

मुंबई : (Mumbai) भारतीय सिनेमा के दिग्गज निर्देशक एसएस राजामौली (Veteran Indian filmmaker S.S. Rajamouli) ने अभिनेता रणवीर सिंह की फिल्म 'धुरंधर 2' की...

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