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New Delhi : उपराष्ट्रपति ने जल संरक्षण को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने की अपील की

नई दिल्ली: (New Delhi) उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सभी नागरिकों से जल संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने की अपील की, ताकि ‘जन आंदोलन’ का यह विषय ‘जल आंदोलन’ को गति दे सके।उपराष्ट्रपति ने शनिवार को विज्ञान भवन में चौथे राष्ट्रीय जल पुरस्कार में अपने संबोधन के दौरान अपनी बात रख रहे थे। कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने 11 श्रेणियों में 41 विजेताओं को सम्मानित किया। उपराष्ट्रपति ने जल संरक्षण के संदेश को बढ़ाने के लिए दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले राष्ट्रीय जल मिशन के शुभंकर, एनिमेटेड चरित्र पीकू की विशेषता वाली एक लघु फिल्म का भी उद्घाटन किया।

यह देखते हुए कि जल का संरक्षण हमेशा भारत की सभ्यतागत प्रकृति का एक अभिन्न पहलू रहा है, उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह प्रकृति के उपहारों का बुद्धिमानी से उपयोग सुनिश्चित करे। उन्होंने जोर देकर कहा, “प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग हमारी इष्टतम आवश्यकता के अनुसार होना चाहिए।” गिलास में पानी नहीं छोड़ने की अपील करते हुए कहा, “पूरा गिलास आपकी टेबल पर आता है, आधा पीते हो, आधा छोड़ देते हो यह संस्कृति ठीक नहीं है।”

उपराष्ट्रपति ने हमारे पारंपरिक जल संचयन संरचनाओं जैसे कि जोहड़ों (तालाबों) को ‘रिड्यूस, रियूज और रिसाइकल के तीन आर’ के लिए नए सिरे से प्रतिबद्धता के माध्यम से पुनर्जीवित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “तालाब, जोहड़ जैसी कई प्राचीन सांस्कृतिक विरासत रूपी व्यवस्थाओं को संरक्षित एवं पुनर्जीवित करने के लिए हमें तीन आर – रिड्यूस, रियूज और रिसाइकल के मंत्र को अपनाना होगा।”

जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में उनके अनुकरणीय कार्य के लिए विजेताओं को बधाई देते हुए, उपराष्ट्रपति ने पंचायत, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सभी जनप्रतिनिधियों से जल संरक्षण को प्राथमिकता देने और उदाहरण द्वारा नेतृत्व करने का आह्वान किया।

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