spot_img

New Delhi : 5 स्व से ही भारत एवं भारतीयों का विकास संभवः डॉ लीना गहाणे

राष्ट्र सेविका समिति का 15 दिवसीय प्रवेश वर्ग समापन समारोह

नई दिल्ली : समाज के एक-एक बिंदु का विकास ही समिति का प्रथम कर्तव्य है और विकास का आधार है पांच स्व। स्वधर्म, स्वसंस्कृति, स्वदेश, स्वाभिमान और स्वाबलंबन। यह विचार डॉ लीना गहाणे ने राष्ट्र सेविका समिति दिल्ली प्रांत के प्रवेश वर्ग के समापन समारोह के अवसर पर व्यक्त किए।

डॉ लीना गहाणे ने कहा कि व्यक्ति एवं समाज जब इन 5 स्व का ध्यान करता है तब ही देश और समाज आत्मनिर्भर एवं विकसित होकर प्रगति के मार्ग की ओर बढ़ता है। भारत ने स्वाभिमान, स्वावलंबन के बल पर ही कोरोना वायरस पर लगातार शोध किए तथा देश व दुनिया को इस महामारी से बचाया। उन्होंने एक भारतीय महिला वैज्ञानिक, जिसने गर्भावस्था के आखिरी दिनों में भी इस रिसर्च और ट्रायल्स में कार्य किया, का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने उक्त महिला वैज्ञानिक को गर्भावस्था में टेंशन ना लेने की सलाह दी था, बावजूद इसके वह जिस दिन ट्रायल सफल हुआ उस दिन भी रिसर्च वर्क में लगी रही और उसी दिन अस्पताल में डिलीवरी के लिए पहुंची। यह जज्बा महिलाओं के आत्मबल को दर्शाता है कि वे मानसिक और बौद्धिक स्तर पर कितनी सशक्त हैं।

डॉ गहाणे ने स्वामी विवेकानंद का भी उदाहरण देकर अपने कथन को स्पष्ट किया है कि भारत रूपी गरुड़ को अगर ऊंचे आसमान में उड़ना है तो उसके दोनों पंख समान रूप से सबल होने चाहिए। एक पंख पुरुष है तो दूसरा पंख महिला। महिला परिवार के साथ-साथ समाज को भी नेतृत्व प्रदान करें उसके लिए आवश्यक है कि महिलाओं का मानसिक, बौद्धिक, शारीरिक व आध्यात्मिक विकास हो। ऐसा ही कुछ कार्य विगत 87 वर्षों से विश्व के सबसे बड़े महिला संगठन राष्ट्र सेविका समिति महिलाओं के लिए कर रही है।

राष्ट्र सेविका समिति की दिल्ली प्रान्त कार्यवाहिका व प्रबोध वर्गाधिकारी सुनीता भाटिया ने कहा कि हमारे शिविर महिलाओं के भीतर छुपी शक्ति और प्रतिभा को जागृत करते हैं।

मुख्य अतिथि डॉ रितु श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्र सेविका समिति आठ दशकों से भी अधिक समय से महिलाओं के सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभा रही है। राष्ट्र सेविका समिति भारत का ही नहीं बल्कि विश्व का सबसे बड़ा महिला संगठन है। यह पिछले 87 वर्षों से महिलाओं में मातृत्व, नेतृत्व और कृतित्व के गुण विकसित कर रहा है और साथ ही देश के चतुर्मुखी विकास में अमूल्य योगदान दे रहा है। वर्ग में बालिकाओं ने नियुद्ध, (जूडो-कराटे), योग, चाप कला, दंड प्रहार, छुरी प्रहार, बाइक स्टंट का शानदार प्रदर्शन कर सभी को अचम्भित किया।

राजधानी दिल्ली के कृष्णा नगर स्थित गीता बाल भारती विद्यालय में आयोजित राष्ट्र सेविका समिति के प्रवेश वर्ग में लगभग 200 बालिकाएं, किशोरियां और महिलाएं 15 दिन के प्रशिक्षण शिविर में आईं। ग्रीष्म अवकाश के मौके पर प्रतिवर्ष विद्यालय जाने वाली छात्राओं को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी एवं सामाजिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाने के उद्देश्य से इस शिविर आयोजन किया जाता है। प्रवेश वर्ग में शामिल होने की आयु सीमा 14 वर्ष से लेकर लगभग 55 वर्ष तक है। यहां प्रतिभागियों को एक साथ रहकर सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता, आत्मरक्षा और आत्म स्वाभिमान जैसे गुण सीखने का अवसर मिलता है।

इस शिक्षा वर्ग समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ रितु श्रीवास्तव (वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक) सीएसआईआर, अध्यक्षा अनुजा सक्सेना अधिवक्ता, मुख्य वक्ता डॉ लीना गोविंद गहाणे (अखिल भारतीय बौद्धिक सह प्रमुख), प्रवेश वर्ग वर्गाधिकारी जानी-मानी समाज सेविका भारती खन्ना, प्रबोध वर्गाधिकारी सुनीता भाटिया, दिल्ली प्रांत कार्यवाहिका विजया शर्मा, प्रांत सह कार्यवाहिका विदुषी शर्मा, दिल्ली प्रांत सह कार्यवाहिका प्रतिभा बिष्ट, अखिल भारतीय घोष अध्यक्ष पंकजा अत्रे, उत्तर क्षेत्र कार्यवाहिका चंद्रकांता जी एवं अन्य अधिकारीगण सेविका बहनें तथा बड़ी संख्या में सम्मानित नागरिक उपस्थित रहे।

Explore our articles