सरकार को दी कुछ दिन की मोहलत
हरिद्वार : अपने मेडल गंगा में बहाने हरिद्वार पहुंचे पहलवानों ने भाकियू नेता नरेश टिकैत के समझाने पर कुछ दिनों के लिए अपना यह निर्णय स्थगित कर दिया और हरिद्वार से वापस लौट गए। आंदोलनकारी पहलवान दिल्ली से शाम को हरिद्वार पहुंचे। उनके आने और मेडल विसर्जन की सूचना से प्रशासन में भी हड़कंप मच गया। एसएसपी सहित आला अधिकारी घटनाक्रम पर नजर रखने के लिए हरकीपैड़ी पर मौजूद रहे। हालांकि हरकीपैड़ी की प्रबंधकारिणी गंगा सभा ने पहलवानों के आने की सूचना पर पहले ही ऐलान कर दिया था कि यदि पहलवान पूजा या गंगा स्नान के लिए आ रहे हैं तो उनका स्वागत रहेगा लेकिन हरकीपैड़ी पर किसी विरोध प्रदर्शन या मेडल विसर्जन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
गंगा सभा के विरोध पर सभी पहलवान हर की पैड़ी से सटे नाई सोता घाट पर पहुंचे। जहां पहले से मौजूद भारतीय किसान यूनियन के नेता व राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने मेडल को देश की शान बताते हुए गंगा में न बहाने की अपील की तथा आगे आंदोलन में सहयोग का आश्वासन दिया जिसके बाद पहलवानों ने कुछ दिन की मोहलत देते हुए अपना निर्णय बदल दिया और वापस लौट गए।
हरिद्वार पहुंचे आंदोलनकारी पहलवानों के जत्थे में महिला पहलवान साक्षी मलिक, संगीता फोगाट और विनेश फोगाट सहित अन्य खिलाड़ी शामिल थे।
इस मौके पर साक्षी मलिक ने कहा कि मेडल क्योंकि हमारे लिए बहुत ही पवित्र हैं। इन्हें हम भ्रष्ट तंत्र के साथ नहीं रखना चाहते। इसलिए इन पवित्र मेडलों को पवित्र व पतित पावनी मां गंगा में विसर्जित करने का निर्णय लिया गया था। फिलहाल कुछ दिनों के लिए हम इस निर्णय को स्थगित कर रहे हैं।
बता दें कि कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर पॉक्सो एक्ट समेत कई धाराओं में केस दर्ज होने के बाद भी उनकी गिरफ्तारी न होने पर महिला पहलवान आंदोलनरत हैं। जिसके बाद उन्होंने अपने मेडल गंगा में विसर्जित करने का ऐलान किया था।
उधर, हरकी पैड़ी की प्रबंध कारिणी संस्था गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम व महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने प्रकरण पर कहा कि हरकी पैड़ी लाखों करोड़ों हिंदुओं की आस्था का स्थल है। हर की पेडी को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाया जा सकता। यहां पर किसी राजनीतिक मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन या मेडल विसर्जन की अनुमति नहीं दी जा सकती।
गंगा दशहरा जैसे बड़े पर्व के चलते हर की पैड़ी पर उपस्थित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने कहा कि,पहलवान किसी भी निर्णय के लिए स्वतंत्र हैं। अगर वो अपने पदक पवित्र गंगा में विसर्जित करने आ रहे हैं तो यह उनका निर्णय है। हरिद्वार पुलिस ने इस मामले में किसी तरह का कोई हस्तक्षेप या सख्ती नहीं की।


