जयपुर : चुनाव करीब आते देख राजस्थान सरकार जल जीवन मिशन योजना (जेजेएम) पर गंभीरता दिखाने की कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत देश के सभी 19.45 करोड़ ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचाना है, लेकिन अब तक राजस्थान सरकार ने जेजेएम के क्रियान्वयन की रफ्तार बेहद धीमी रखी है और मिशन के साढ़े तीन साल बीत जाने के बाद भी प्रदेश में 41.93 लाख (38.8 प्रतिशत) घरों तक की नल से जल पहुंचाया जा सका है, जबकि राष्ट्रीय कवरेज 16.64 प्रतिशत से बढ़कर 62.33 प्रतिशत हो गया है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रयासों से राजस्थान को अब तक देश में सर्वाधिक 27 हजार करोड़ से अधिक धनराशि आवंटित हुई है। मंगलवार को राज्य स्तरीय परियोजना स्वीकृति समिति (एसएलएसएससी) की 37वीं बैठक में जेजेएम के तहत 22,854 करोड़ की पांच वृहद् पेयजल परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। इनसे प्रदेश के 11 जिलों के 5739 गांवों के 15 लाख से अधिक घरों में जल कनेक्शन दिए जाएंगे।
केंद्रीय मंत्री शेखावत शुरुआत से इस बात को लेकर चिंता जताते रहे हैं कि राजस्थान में जल जीवन मिशन की गति बेहद धीमी है, जबकि यहां पानी की आवश्यकताएं अधिक हैं। राजस्थान की कांग्रेस सरकार शुरू से जेजेएम को लेकर राजनीति करती आ रही है। यही कारण है कि वर्तमान में राजस्थान देश में नल कनेक्शन देने में नीचे से तीसरे नंबर पर है। उससे नीचे पश्चिम बंगाल और झारखंड ही आते हैं। राजस्थान के 33 में से 7 जिले भरतपुर, बाड़मेर, उदयपुर, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, जैसलमेर और बांसवाड़ा ऐसे हैं, जहां 25 प्रतिशत से कम घरों में मिशन का लाभ मिल रहा है। केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि राजस्थान सरकार को पूरी प्रतिबद्धता के साथ भारत सरकार समर्थन दे रही है। राज्यों की किसी भी समस्या का तुरंत समाधान मुहैया कराया जा रहा है। फिर भी राजस्थान में जेजेएम के तहत 1.08 करोड़ ग्रामीण परिवारों के लिए 10 हजार 781 योजनाओं की स्वीकृति प्रदान की गई है। अब तक केवल 51.18 लाख (53.2 प्रतिशत) परिवारों के लिए ही निविदा प्रक्रिया पूरी कर कार्य को प्रारंभ कर पाई है। 12 हजार 138 स्वीकृत योजनाओं में 2,888 योजनाएं अभी तक जमीनी स्तर पर शुरू भी नहीं हुई हैं।
शेखावत ने बताया कि जेजेएम के तहत वित्तीय वर्ष 2022-23 में राजस्थान को 13 हजार 328.60 करोड़ रुपए आवंटित किए गए, लेकिन राज्य सरकार अपने उदासीन रवैया के कारण 50 प्रतिशत राशि भी खर्च नहीं कर सकी है। राजस्थान सरकार ने इसमें से अब तक केवल 6081.80 करोड़ रुपए निकाले हैं। राज्य की ओर से जेजेएम में खर्च की जाने वाली राज्य भागीदारी की राशि उपलब्ध कराने में भी देरी हुई है। केंद्रीय मंत्री शेखावत ने बताया कि जेजेएम में वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2022-23 तक राजस्थान सरकार को 27 हजार 333 करोड़ रुपए का फंड आवंटित हो चुका है, जबकि राज्य सरकार ने इसमें से 10 हजार 359 करोड़ रुपए ही निकाले हैं। इसमें भी 7899 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। राज्य सरकार ने 7207.17 करोड़ रुपए अपने शेयर से निकाले हैं।
एसएलएसएससी की 37वीं बैठक में जल जीवन मिशन के तहत पांच वृहद् पेयजल परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई, जिनसे प्रदेश के 11 जिलों के 5739 गांवों के 15 लाख से अधिक घरों में जल कनेक्शन दिए जाएंगे।
- 7934 करोड़ की सीकर-झुंझुनूं परियोजना : सीकर जिले के 864 और झुंझुनूं जिले के 269 गांवों के 3,44,120 घरों में जल कनेक्शन दिए जाएंगे।
- 5783 करोड़ की चम्बल -अलवर-भरतपुर परियोजना : अलवर जिले के 882 और भरतपुर जिले के 335 गांवों में 3,96,223 घरों में जल कनेक्शन होंगे।
- 3693 करोड़ की जाखम बांध आधारित परियोजना : चित्तौड़गढ़ जिले के 708, उदयपुर के 375, राजसमंद के 297 और प्रतापगढ़ जिले के 93 गांवों 2,11,926 घरों में जल कनेक्शन दिए जाएंगे।
- 4623 करोड़ की चम्बल -करौली-सवाई माधोपुर परियोजना : करौली जिले के 851 और सवाई माधोपुर जिले के 581 गांवों में 4,37,279 जल कनेक्शन दिए जाएंगे।
- 821 करोड़ की कालीतीर -धौलपुर परियोजना : धौलपुर जिले के 376 और भरतपुर जिले के 94 गांवों में 1,21,598 जल कनेक्शन दिए जाएंगे।
जोधपुर के 79 गांवों के लिए परियोजना मंजूर
जोधपुर जिले के देचू और लोहावट ब्लॉक के 79 गांवों तथा उनकी 325 बस्तियों में इंदिरा गांधी नहर से पेयजल आपूर्ति के लिए 246.20 करोड़ लागत की परियोजना को भी मंजूरी दी गई। इसके अलावा 130.38 करोड़ की 33 गांवों की 59 नई लघु पेयजल परियोजनाओं (ओटीएमपी) को स्वीकृति मिली। इन परियोजनाओं से 13 हजार 132 जल कनेक्शन होंगे।


