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New Delhi : विक्टोरिया गौरी की न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति पर आक्षेप नहीं लगाया जाना चाहिए : सरकार

नयी दिल्ली: (New Delhi) कानून मंत्री किरेन रीजीजू ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं और इसके समाधान के तरीके हैं। उन्होंने न्यायाधीशों की नियुक्ति के मुद्दे पर न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच मतभेद के संबंध में यह टिप्पणी की।

सरकार ने यह भी कहा कि विक्टोरिया गौरी की उच्च न्यायालय की न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति पर आक्षेप नहीं लगाया जाना चाहिए और उन्हें एक प्रक्रिया के जरिए नियुक्त किया गया है। सदन के नेता पीयूष गोयल ने यह टिप्पणी तक की जब तृणमूल कांग्रेस सदस्य जवाहर सरकार ने सवाल किया कि क्या गौरी की नियुक्ति सही थी, जबकि उन पर सार्वजनिक रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है।गोयल ने कहा, “मुझे लगता है कि कुछ गरिमा होनी चाहिए। एक माननीय न्यायाधीश की एक प्रक्रिया के जरिए नियुक्ति की गई है। मुझे नहीं लगता कि यहां के माननीय सदस्यों को इस तरह का आक्षेप करना चाहिए। ’’

राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि राज्य के तीनों अंगों को मिलकर काम करना होगा और “हमें उनके लिए पारस्परिक सम्मान रखना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘…इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का एक निर्णय पहले ही आ चुका है और इस मुद्दे को दूर रखा जाना चाहिए।’’उन्होंने सरकार से यह भी कहा कि वह उस व्यक्ति का जिक्र कर रहे हैं जो सदन की सदस्य नहीं हैं। उन्होंने कहा, “आप जो संदर्भ दे रहे हैं, उस पर माननीय राष्ट्रपति ने नियुक्ति का आदेश जारी किया है और उच्चतम न्यायालय ने पहले ही इस पर विचार कर लिया है।”रीजीजू ने प्रश्नकाल में सरकार के पूरक सवालों के जवाब में कहा कि जब सदस्य इस गरिमामय सदन में बोल रहे हैं तो संवेदनशील बातों का ध्यान रखना चाहिए।

उन्होंने न्यायाधीशों की नियुक्ति पर न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच किसी मतभेद संबंधी सरकार के एक सवाल पर कहा कि पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह को नियमों और मर्यादा के बारे में बताए जाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर विचारों में मतभेद हैं, तो यह लोकतंत्र का एक हिस्सा है। उन्होंने कहा कि एक परिवार के भीतर, राजनीतिक दलों के भीतर, मतभेद होते हैं और जब मतभेद होते हैं, तो उसके समाधान के तरीके भी होते हैं।रीजीजू ने कहा कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के 210 पद रिक्त

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