मुंबई : सेंट्रल रेलवे द्वारा अपने यात्रियों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता के तहत भारतीय रेल पर अल्ट्रा-फिल्टरेशन मेंब्रेन टेक्नोलॉजी के कार्यान्वयन के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के साथ हाथ मिलाया है। बीएआरसी ने माइक्रोबियल संदूषण, मैलापन, लवणता, कठोरता, फ्लोराइड, आर्सेनिक, लोहा और अन्य कई संदूषणों को हटाने के लिए पॉलीसल्फोन आधारित अल्ट्रा-फिल्ट्रेशन मेम्ब्रेन तकनीक विकसित की है, जो पीने योग्य पानी और BIS 10500 पीने के पानी के मानक के अनुरूप है। यह एक ऊर्जा कुशल और कम लागत वाली तकनीक है, जिसका भारत के 50 गांवों में परीक्षण किया जा रहा है। सेंट्रल रेलवे मुंबई मंडल ने पहले चरण में 4 स्टेशनों पर 10 स्थानों की चिन्हित किया है। छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (1), सैंडहर्स्ट रोड (1), दादर (4) और लोकमान्य तिलक टर्मिनस (4) पर बीएआरसी की अल्ट्रा-फिल्ट्रेशन मेम्ब्रेन तकनीक से स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जाएगी।
सेंट्रल रेलवे स्वीकृत सभी स्थानों पर उपकरणों की शीघ्र स्थापना करेगा
इस संबंध में एक समझौते पर श्री के.टी. शेनॉय, निदेशक, BARC की ओर से केमिकल इंजीनियरिंग ग्रुप और श्री रॉबिन कालिया, सीनियर डीसीएम, मुंबई की ओर से सेंट्रल रेलवे की ओर से दिनांक 6 जनवरी 2023 को श्रीमती इति पांडे, मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (PS) मध्य रेल और ए के अदक की उपस्थिति में हस्ताक्षर किया किया गया। इस अवसर पर प्रमुख, विलवणीकरण और मेंम्ब्रेन तकनीक, बीएआरसी, डॉ अशोक उपाध्याय, अतिरिक्त मुख्य इंजीनियर, एनपीसीआईएल और डॉ सौमित्र कर,संयोजक, विलवणीकरण और मेंम्ब्रेन तकनीक, बीएआरसी उपस्थित थे। सेंट्रल रेलवे स्वीकृत सभी स्थानों पर उपकरणों की शीघ्र स्थापना के लिए सभी सहायता और सहयोग प्रदान करेगा।


