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BHIWANDI : आदिवासी क्षेत्र में सरकारी सुविधाएं नदारद

आदिवासी महिलाएं सरकार की अनदेखी की शिकार

◼️नल तो है पर पानी नहीं,तीन किमी दूर से पानी लेकर बुझती है प्यास

◼️शौचालय के अभाव में जंगल में शौच के लिए जाने को मजबूर महिलाएं

भिवंडी : ठाणे से मात्र 40 किमी की दूरी पर रहने वाली आदिवासी महिलाएं सरकार की अनदेखी की शिकार है। भिवंडी तालुका के खोणी ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले आदिवासी गांव दाभाडपाड़ा में रहने वाली महिलाओं को पिछले कई महीनों से पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत द्वारा बोरिंग एवं नल कनेक्शन दिए गए है, लेकिन उसमें पानी न आने के कारण महिलाओं को काम छोड़कर दूर दराज के कारखानों से पानी लाने के लिए तीन किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है, जिसके कारण उनका कई घंटा समय पानी की तलाश में बर्बाद हो जाता है।सरकारी उपेक्षा की शिकार आदिवासी महिलाओं में ग्राम पंचायत व सरकार के प्रति घोर नाराजगी व्यक्त है।

दाभापाड़ा में 300 से अधिक आदिवासी नागरिक
बता दें की भिवंडी तालुका के दाभापाड़ा में 300 से अधिक आदिवासी नागरिक रहते हैं,जहां पर पानी सहित अन्य मूलभूत सुविधा न होने के कारण लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।स्थकनिय लोगों को पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। आदिवासी महिलाओं का आरोप है कि सरकार व ग्राम पंचायत द्वारा आदिवासी गांव होने के कारण उनकी उपेक्षा की जा रही है।शहर से कुछ ही दूरी पर स्थित इस आदिवासी पाड़ा में पानी के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत बोरिंग और नल लगवाए गए है। लेकिन इन आदिवासी महिलाओं ने बताया कि उन बोरिंग एवं नलों में पानी नहीं आता है।महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया है कि यह सुविधाएं केवल सरकारी निधी की हेराफेरी हेतु बनाई गई हैं।

मोदी के घर-घर शौचालय अभियान भी उनके गांव में बेअसर साबित
प्रशासन द्वारा पीएम मोदी के घर-घर शौचालय अभियान भी उनके गांव में बेअसर साबित हो रहा है,क्योंकि उक्त पाड़ा आज तक एक शौचालय भी नहीं निर्माण किया गया है। आदिवासी महिलाओं का आरोप है कि ग्राम पंचायत जानबूझकर इसकी अनदेखी कर रहा हैं।ग्राम पंचायत को निधि उपलब्ध होने के बावजूद इस वार्ड मे कई कार्य ठेकेदारों की नियुक्ति के कारण अटके हुए हैं। यहां की आदिवासी महिलाओं और स्कूली छात्राओं को शौचालय की सुविधा नहीं होने के कारण रात के अंधेरे में जंगल में अपनी जान हथेली पर लिए जाना पड़ता है।जहाँ हमेशा सांपों के काटने का भय बना रहता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि गांव में जल्द से जल्द पानी की व्यवस्था किए जाने के साथ शौचालय का निर्माण भी कराया जाए।

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