
मुंबई : दक्षिण मुंबई में स्थित कुवैत के शाही परिवार के मालिकाना हक वाले अल-सबा कोर्ट भवन को खाली करने का निर्देश शहर के तीन उद्यमियों को देने से इंकार करते हुए बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि पहली नजर में उनका किरायानामा फर्जी या जाली मालूम नहीं होता है।कुवैत के शाही परिवार ने अपनी सबसे बड़ी बेटी के माध्यम से अर्जी देकर आरोप लगाया है कि तीनों उद्यमियों ने उनकी इमारत में अवैध तरीके से और जबरन कब्जा कर लिया है।शाही परिवार ने तीनों के खिलाफ 2014 में मुकदमा किया था जो अभी तक लंबित है। शाही परिवार ने एक अन्य अर्जी देकर अदालत से तीनों को परिसर खाली करने और 2013 से परिसर पर अवैध कब्जे के दौरान का किराया भरने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।
न्यायमूर्ति बी. पी. कोलाबावाला की एकल पीठ ने इस स्तर पर ऐसा कोई भी आदेश देने से इंकार कर दिया।हालांकि, अदालत ने कुवैत के शाही परिवार द्वारा उनके खिलाफ दायर मुकदमा लंबित रहने तक तीनों उद्यमियों को तीसरे पक्ष को शामिल करने या संपत्ति के साथ अन्य कुछ भी किए जाने पर पाबंदी लगा दी है।
अल-सबा कोर्ट भवन परिसर को तत्काल खाली कराया जाए
अदालत शेखाह फाडिया साद अल-अब्दुल्ला अल-सबा द्वारा दी गई अंतरित अर्जी पर सुनवाई कर रही थी। वह कुवैत के पूर्व प्रधानमंत्री और राष्ट्राध्यक्ष दिवंगत शाह शेख साद अल-अब्दुल्ल अल-सलेम अल-सबा की बेटी हैं।अर्जी में अनुरोध किया गया था कि तीनों उद्यमियों को जबरन संपत्ति पर कब्जा करने वाला घोषित किया जाए और अल-सबा कोर्ट भवन परिसर को तत्काल खाली कराया जाए।पीठ ने अपने आदेश में कहा कि कुवैत के पूर्व महा वाणिज्यदूत फैसल एस्सा और तीन प्रतिवादियों संजय पूनमिया, अमिश शेख और महेश सोनी के बीच बना किरायानामा ‘फर्जी या जाली’ नहीं है। एस्सा को कुवैत के शाही परिवार ने औपचारिक रूप से अल-सबा कोर्ट भवन के देखेरख की जिम्मेदारी दी हुई थी।अदालत ने कहा कि पहली नजर में ऐसा प्रतीत होता है कि किरायानामा का दस्तावेज फैसल एस्सा द्वारा बनवाया गया है।अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 दिसंबर की तारीख तय की है।


