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BHIWANDI : भिवंडी में अधर में लटका फेरीवालों का बायोमेट्रिक सर्वेक्षण

बायोमेट्रिक मशीन में आई फिर खराबी,मरम्मत के लिए भेजा गया पुणे

साढ़े आठ हजार फेरीवालों का होना है सर्वेक्षण

22 माह में हुआ 2557 फेरीवालों का सर्वे

भिवंडी : शहर में फेरीवाला को पहचान पत्र देने के साथ हॉकर और नो हॉकर जोन निर्माण के लिए मनपा द्वारा किया जा रहा बायोमेट्रिक सर्वेक्षण एकबार पुनः अधर में लटक गया है।क्योंकि सर्वेक्षण के दौरान उक्त मशीन ही खराब हो गई है। सरकार द्वारा दिए गए पोर्टल का बायोमेट्रिक मशीन सपोर्ट नहीं कर रही है जिसके मरम्मत के लिए उसे पुणे भेज दिया गया है।हालांकि अभी तक मात्र ढाई हजार फेरीवालों का ही सर्वेक्षण किया गया है।जिसके कारण मनपा के कार्यकलापों पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। बता दें कि सरकार के निर्देशानुसार मनपा क्षेत्र में व्यवसाय करने वाले फेरीवालों का बायोमेट्रिक सर्वेक्षण किया जाना था।जिसके तहत भिवंडी मनपा क्षेत्र में लगभग साढ़े आठ हजार फेरीवालों से संपर्क करके उनका सर्वेक्षण का लक्ष्य दिया गया था जिसका कार्य मार्केटिंग विभाग प्रमुख संजय ठाकरे एवंकैलास पाटील के नेतृत्व में जनवरी 2021 से फेरीवालों का सर्वेक्षण शुरू किया गया था,लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण एवं सरकार द्वारा दिए गए ऐप को बायोमेट्रिक मशीन द्वारा सहयोग न करने के कारण बायोमेट्रिक सर्वेक्षण का काम बंद कर दिया गया था।लेकिन मनपा आयुक्त द्वारा पिछले महीने ली गई पथविक्रेता समिति की बैठक के बाद सर्वेक्षण का काम पुनः शुरू किया गया था।अभी तक मनपा द्वारा दो वर्षों में मात्र 2557 फेरीवालों का सर्वेक्षण किया जा सका है।

ऐप का सहयोग न करने के कारण मशीन बार-बार हो रही बंद
अब बायोमेट्रिक मशीन द्वारा ऐप का सहयोग न करने के कारण मशीन बार-बार बंद हो जा रही है।जिससे सर्वेक्षण में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बायोमेट्रिक मशीन खराब हो जाने के कारण पिछले कई दिनों से सर्वेक्षण का काम बंद है।बायोमेट्रिक मशीन की मरम्मत के लिए पुणे भेज दिया गया है।बायोमेट्रिक मशीन ऐप का सहयोग क्यों नहीं कर रही है इसके बारे में जानकारी लेने के लिए संबंधित विभाग के लोगो को पुणे बुलाया गया है।।कैलास पाटील ने बताया कि लगभगसाढ़े आठ हजार फेरीवालों का सर्वेक्षण करने का लक्ष्य दिया गया है लेकिन वह संख्या बढ़कर 10 हजार भी हो सकती है। भिवंडी ठेला चालक मालक संगठना के अध्यक्ष अदनान मोमिन ने मनपा के सर्वेक्षण कार्य मे हो रही लेटलतीफी पर सवाल उठाया है।उनका कहना है कि मनपा एक ठेले से हर दिन 30 रुपये के हिसाब से हर साल 10 हजार 800 रुपया देते है।उनका कहना है कि मनपा के पास कोई फेरीवाला जोन नही है।न तो आज तक मनपा ने किसी भी फेरीवाले को कोई आई कार्ड जारी हुआ है।इतना ही नही उन्होंने बताया कि मनपा को यह भी नही पता है कि शहर में ठेले वाले कितने है?उन्होंने कहा है कि यदि मनपा चाहे तो एक माह में यह सर्वेक्षण कर सकती है।जो 22 माह में भी नही पूरा हुआ।

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