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Varanasi : कोशिकाओं पर शोध, जैविक इंजीनियरिंग की सबसे बड़ी उपलब्धि: पी. बलराम

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आईआईटी बीएचयू में कैंपस डायलॉग विद स्टूडेंट्स

वाराणसी : आईआईएससी बैंगलोर के पूर्व निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर पद्मनाभन बलराम ने कहा कि कोविड-19 के कई नए वेरियंट आ गए हैं, समय के साथ म्यूटेशन भी बढ़ गए हैं। कोशिकाओं पर शोध को जैविक इंजीनियरिंग की सबसे बड़ी उपलब्धि माना और कहा कि जीव विज्ञान, विज्ञान के सभी क्षेत्रों को एकीकृत करता है।

प्रोफेसर पद्मनाभन बलराम सोमवार को आईआईटी (बीएचयू) के अनुसंधान प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित ’कैंपस डायलॉग विद स्टूडेंट्स’ को सम्बोधित कर रहे थे। इस वार्ता का शीर्षक था ’रेफलेक्शन ऑन साइंस इन द आफ्टरमाथ ऑफ द कोरोना वायरस पैनडेमिक’। प्रो. बलराम ने विज्ञान के इतिहास के बारे में बताया कि कैसे हम विभिन्न दुनिया को समझने के लिए पहले के मानव से सूक्ष्मदर्शी और दूरबीनों का उपयोग करने तक आगे बढ़े हैं।

उन्होंने डॉ. रिचर्ड फेनमैन की परमाणु परिकल्पना को दोहराया और समझाया कि प्रलय की स्थिति में जहां सारा ज्ञान नष्ट हो जाएगा, मनुष्यों को अपना शोध इस तथ्य से शुरू करना चाहिए कि ’आल थिंग्स आर मेड ऑफ मैटर’। महामारी के विकास के बारे में भी बात की गई, जहां उन्होंने आज की दुनिया में जैव प्रौद्योगिकी के महत्व पर जोर दिया । यह सत्र 300 की क्षमता वाले एनी बेसेंट लेक्चर थिएटर में आयोजित किया गया था, जो छात्रों, शोध छात्रों, पीएचडी.विद्यार्थियों से भरा था। सभी लोग इतने उत्साहित थे कि कई छात्र और संकाय सदस्य सत्र समाप्त होने के बाद भी रुके रहे और प्रोफेसर बलराम के साथ विज्ञान के क्षेत्रों पर चर्चा करते रहे। प्रोफेसर बलराम पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ उनके सवालों का जवाब दे रहे थे।

इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत आईआईटी (बीएचयू) के अनुसंधान एवं विकास के अधिष्ठाता प्रोफेसर विकाश कुमार दुबे और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संजीव कुमार महतो ने प्रोफेसर पी. बलराम का स्वागत किया।

गौरतलब हो कि प्रोफेसर पी. बलराम, एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक और लेखक पांच दशकों में लगभग 1000 प्रकाशनों और 25000 साइटेशन के साथ एक प्रभावशाली करियर को समाहित किए हुए हैं। महज 24 साल की उम्र में नोबेल पुरस्कार विजेता रॉबर्ट बर्न्स वुडवर्ड के तहत हार्वर्ड में अपना पोस्ट डॉक्टरल प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, उन्होंने बाद में दस वर्षों से अधिक समय तक आईआईएससी, बैंगलोर के निदेशक के रूप में कार्य किया।