सुलतानपुर : ” नैनो विज्ञान हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा है। नैनो तकनीक के कारण विज्ञान के पारम्परिक सिद्धांतों और सूत्रों में बदलाव हो रहा है । अधिकतम पंद्रह वर्षों में भारत नैनो तकनीक में विश्व में नम्बर एक होगा ।” यह बातें जर्मन सरकार के विज्ञान सलाहकार व बर्लिन के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ अजय विक्रम सिंह ने गुरुवार को कहीं।
वह राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संगोष्ठी कक्ष में बाबू धनंजय सिंह स्मृति आंतरिक व्याख्यान माला के अंतर्गत विज्ञान संकाय द्वारा आयोजित ”नैनोसाइंस और नैनोटेक्नोलॉजी: परमाणु द्वारा विश्व को आकार देना” विषय पर आयोजित संगोष्ठी को बतौर मुख्य वक्ता सम्बोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि नैनो तकनीक से मेडिसिन केवल उन्हीं कोशिकाओं तक पहुंचती हैं जो बीमार हैं । इससे शरीर के अन्य अंग सुरक्षित रहते हैं। आज नैनो तकनीक के कारण ही इलेक्ट्रॉनिक, टेक्सटाइल, फैब्रिक, उर्जा, कम्प्यूटर, मोबाइल आदि क्षेत्र बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। रक्षा और कृषि में इस तकनीक से अनेक सकारात्मक बदलाव आये हैं। हर क्षेत्र में दुनिया नैनो तकनीक पर आश्रित होती जा रही है ।
मुख्य वक्ता ने विद्यार्थियों को अध्ययन और शोध के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि मैं भी सुलतानपुर का हूं और यहां के विद्यार्थियों की प्रगति के लिए उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हमेशा तत्पर हूं।
स्वागत प्राचार्य प्रोफेसर दिनेश कुमार त्रिपाठी ,आभार ज्ञापन पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर एम पी सिंह , परिचय विज्ञान संकायाध्यक्ष डॉ.शिशिर श्रीवास्तव व संचालन डॉ प्रीति प्रकाश ने किया।
प्राचार्य ने अंगवस्त्र, पुष्प गुच्छ और स्मृति चिन्ह भेंट कर मुख्य अतिथि को सम्मानित किया।
इस अवसर पर उप प्राचार्य प्रोफेसर निशा सिंह, केएनआई के पूर्व वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ए के सिंह, आईक्युएसी निदेशक इंद्रमणि कुमार, डॉ.धीरेन्द्र कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि सहित महाविद्यालय के समस्त शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।


