प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मदनमोहन मालवीय तकनीकी विश्वविद्यालय गोरखपुर की 2021-22 प्रवेश में फर्जी सीट आवंटन मामले में 67 अभ्यर्थियों का प्रवेश निरस्त करने के आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है और सभी याचियों को अपनी पढ़ाई पूरी करने, उन्हें परीक्षा में बैठने व परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया है।
तकनीकी विश्वविद्यालय ने प्रोविजनल सीट आवंटन पत्र को फर्जी बताते हुए याची छात्रों के प्रवेश निरस्त कर दिए थे। कोर्ट ने कहा विश्वविद्यालय के अधिकारियों व स्टाफ के खिलाफ जांच की गई। वे लापरवाही के दोषी पाए गए।याची छात्रों की जांच नहीं की गई। उन पर यह आरोप भी नहीं कि उन्होंने फर्जी सीट आवंटन पत्र तैयार किया था। अगर अधिकारियों ने गलती की तो उनकी गलती के लिए बिना जांच में दोषी ठहराए छात्रों को दंडित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा याचियों के प्रवेश से किसी के अधिकार प्रभावित नहीं हुए। शेष छात्र पढ़ रहे हैं। अधिकारियों ने प्रवेश दिया जिसमें याचियों की भूमिका नहीं है। आनलाइन आवेदन मांगे गए। सारी कार्यवाही विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर समय समय पर अपलोड की गई। उनका सत्यापन किया गया। छात्रों के पास जो दस्तावेज थे, वे जमा किए। ऐसे में प्रवेश निरस्त करना सही नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र ने मिलिंद सक्सेना व 15 अन्य सहित दो अन्य याचिकाओं कुल 67 छात्रों की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
मालूम हो कि तकनीकी विश्वविद्यालय गोरखपुर ने प्रवेश के लिए आन लाइन आवेदन मांगे। मालवीय प्रवेश टेस्ट के जरिए परीक्षा हुई। जो बाद में जेईई मुख्य परीक्षा मे समाहित कर दिया गया। परिणाम घोषित कर काउंसिलिंग के बाद सीट आवंटन किया गया। सभी सफल अभ्यर्थियों को 40 हजार रूपये जमा करने का निर्देश दिया गया। सभी ने पैसे जमा किए और उनका प्रवेश किया गया। मालवीय एकेडमिक कंट्रोल पोर्टल में डाटा फीड किया गया। कहा गया कि याचियों का सीट आवंटन पत्र फर्जी है। अधिकारियों के भूमिका की जांच की गई। उन पर ऐक्शन भी हुआ और याचियों का प्रवेश निरस्त कर दिया गया। जिसे याचिका में चुनौती दी गई।
विश्वविद्यालय की तरफ से 1517 पृष्ठ का जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया।कहा गया जूनियर सहायको व आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने गलती की। उन पर कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने व्यापम घोटाले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी विचार किया और कहा यह केस बिल्कुल अलग है। उसमें छात्रों व अधिकारियों की मिलीभगत व षड्यंत्र था। यहां ऐसा नहीं है। वेबसाइट पर प्रवेश दर्ज हुआ, सत्यापन किया गया। आई डी तैयार की गई। विश्वविद्यालय के अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने माना कि छात्रों की जांच नहीं की गई है। केवल अधिकारियों व स्टाफ की जांच की गई है। इसलिए प्रवेश निरस्त नहीं किया जा सकता।


