
नई दिल्ली : (New Delhi) ग्लोबल ट्रेड में लगातार हो रही उथल-पुथल, ग्रीनलैंड के मसले को लेकर यूरोपीय देशों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) द्वारा दी गई धमकी, कमजोर ग्लोबल संकेतों और स्टॉक मार्केट में विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर आज भारत के मुद्रा बाजार (India’s currency market) में साफ नजर आया। मुद्रा बाजार में बने नकारात्मक माहौल के कारण रुपया आज डॉलर की तुलना में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। भारतीय मुद्रा आज डॉलर की तुलना में 73 पैसे फिसल कर 91.70 (अनंतिम) के स्तर पर बंद हुई। इसके पहले पिछले कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय मुद्रा 90.97 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुई थी।
रुपये ने आज के कारोबार की शुरुआत भी गिरावट के साथ की थी। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट (interbank foreign exchange market) में भारतीय मुद्रा ने आज सुबह डॉलर के मुकाबले 8 पैसे की कमजोरी के साथ 91.05 रुपये के स्तर से कारोबार की शुरुआत की थी। आज का कारोबार शुरू होने के बाद रुपये पर लगातार दबाव बढ़ता चला गया, जिसकी वजह से भारतीय मुद्रा भी कमजोर होती गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चल रही उठापटक के कारण विदेशी निवेशक भारत से अपने पैसे की निकासी करने में लगे रहे। खासकर, स्टॉक मार्केट में विदेशी निवेशकों ने आज चौतरफा बिकवाली कर अपने पैसे निकाले। ऐसा होने से डॉलर की मांग बढ़ी और रुपये पर दबाव बढ़ने लगा। डॉलर की मांग में तेजी आने के कारण मुद्रा बाजार में रुपया डॉलर की तुलना में अभी तक के सबसे निचले स्तर 91.76 तक पहुंच गया। हालांकि दिन के दूसरे सत्र में डॉलर की मांग में कमी आने पर रुपया निचले स्तर से छह पैसे की रिकवरी कर 91.70 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ।
मुद्रा बाजार के आज के कारोबार में रुपये ने डॉलर के साथ ही ज्यादातर दूसरी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले भी कमजोर प्रदर्शन किया। आज के कारोबार के बाद ब्रिटिश पौंड (जीबीपी) की तुलना में रुपया 39.52 पैसे की कमजोरी के साथ 122.98 (अनंतिम) के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह यूरो की तुलना में रुपया आज 64.83 पैसे की गिरावट के साथ 107.32 (अनंतिम) के स्तर पर पहुंच कर बंद हुआ।
खुराना सिक्योरिटीज एंड फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ रवि चंदर खुराना (Ravi Chander Khurana, CEO of Khurana Securities and Financial Services) के अनुसार वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी हलचल और अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड के मसले पर दी गई धमकियों ने ग्लोबल ट्रेड ऑर्डर्स को काफी प्रभावित किया है। इसकी वजह से विदेशी निवेशक लगातार भारत से अपने पैसे की निकासी करने में लगे हुए हैं, जिसका परिणाम भारतीय मुद्रा रुपये की कमजोरी के रूप में सामने आ रहा है।


