
नई दिल्ली : (New Delhi) राऊज एवेन्यू कोर्ट (Rouse Avenue Court) ने मनी लांड्रिंग मामले में रॉबर्ट वाड्रा (Robert Vadra) को जमानत दे दी है। स्पेशल जज सुशांत चंगोट्रा ने रॉबर्ट वाड्रा को 50 हजार के निजी मुचलके और इतनी ही रकम के एक जमानती के मुचलका भरने का आदेश दिया।
कोर्ट में पेश होने के बाद रॉबर्ड वाड्रा ने कहा कि उनका न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। हमारे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। मैं सारे सवालों का जवाब दूंगा। वाड्रा ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) (ED) राजनीतिक दबाव में काम कर रही है। मैं हर जांच का सामना करने को तैयार हूं।
बता दें कि 15 अप्रैल को कोर्ट ने वाड्रा को बतौर आरोपी समन जारी करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने रॉबर्ड वाड्रा समेत 11 आरोपितों को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था। कोर्ट ने रॉबर्ड वाड्रा के अलावा जिन आरोपितों को समन जारी करने का आदेश दिया था उनमें सत्यानंद याजी, केवल सिंह विर्क, मेसर्स स्काई लाईट हॉस्पिटैलिटी प्राईवेट लिमिटेड, मेसर्स स्काई लाईट रियल्टी प्राईवेट लिमिटेड, मेसर्स स्काई लाईट रियल अर्थ इस्टेट्स प्राईवेट लिमिटेड, मेसर्स ब्लू ब्रीज ट्रेडिंग प्राईवेट लिमिटेड, मेसर्स आर्टेक्स, मेसर्स नॉर्थ इंडिया आईटी पार्क्स प्राईवेट लिमिटेड, मेसर्स लंबोदर आर्ड एंटरप्राइजेज इंडिया प्राईवेट लिमिटेड और मेसर्स एसजीवाई प्रोपर्टीज प्राईवेट लिमिटेड शामिल हैं।
कोर्ट ने सभी आरोपितों के खिलाफ मनी लांड्रिंग कानून (Prevention of Money Laundering Act) की धारा 3 और 4 के तहत आरोपों पर संज्ञान लिया। सुनवाई के दौरान रॉबर्ट वाड्रा ने कहा था कि उसके खिलाफ मनी लांड्रिंग का कोई मामला नहीं बनता है। रॉबर्ट वाड्रा के वकील ने कहा था कि ईडी की ओर से दाखिल चार्जशीट पर कोर्ट को संज्ञान नहीं लेना चाहिए।
वाड्रा ने समन जारी करने के फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) में भी चुनौती दी है। उच्च न्यायालय ने समन के आदेश पर रोक लगाने से इनकार करते हुए ट्रायल कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था। कोर्ट ने 2 अगस्त, 2025 को वाड्रा समेत सभी आरोपितों को समन जारी किया था। 17 जुलाई, 2025 को ईडी ने रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ हरियाणा के शिकोहपुर भूमि से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में चार्जशीट दाखिल किया था। इसमें वाड्रा और 10 अन्य लोगों के नाम हैं। उनकी कंपनी, मेसर्स स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड का नाम भी शामिल है। ईडी ने रॉबर्ट वाड्रा और उनकी कंपनी की 37.64 करोड़ की 43 संपत्तियों को मनी लांड्रिंग के मामले में जब्त किया है।
इस मामले की शुरुआत 2008 में हुई थी। गुरुग्राम के शिकोहपुर में जमीन का सौदा हुआ था। स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी ने साढ़े तीन एकड़ जमीन मात्र साढ़े सात करोड़ रुपये में खरीदी थी। वाड्रा इस कंपनी में डायरेक्टर थे। यह जमीन ओंकारेश्वर प्रोपर्टीज से खरीदी गई थी। इस जमीन का मालिकाना हक सिर्फ 24 घंटे में ही वाड्रा की कंपनी के नाम पर हो गया। स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी (Skylight Hospitality) ने 2012 में वही जमीन डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दी। इससे कंपनी को बहुत ज्यादा मुनाफा हुआ। इस मामले में 2018 में एक एफआईआर दर्ज की गई थी।


