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New Delhi : राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए

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नई दिल्ली: (New Delhi) केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की ओर से दायर आपराधिक मानहानि के मामले में आज राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए। गहलोत वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए। एडिशनल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट हरजीत सिंह जसपाल ने मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को करने का आदेश दिया। कोर्ट ने सुनवाई के अगले दिन गहलोत को जमानत लेने का निर्देश दिया।इसके पहले 1 अगस्त को राऊज एवेन्यू कोर्ट के सेशंस जज ने गहलोत को समन करने के एडिशनल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने गहलोत को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की इजाजत दी थी।

एडिशनल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने 6 जुलाई को शेखावत की ओर से दायर आपराधिक मानहानि के मामले पर अशोक गहलोत को समन जारी किया था। कोर्ट ने गहलोत को 7 अगस्त को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था। दिल्ली पुलिस ने 25 मई को अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की थी। इस मामले में गजेंद्र सिंह शेखावत ने कोर्ट में दिए अपने बयान में कहा था कि संजीवनी घोटाले से मेरा कोई संबंध नहीं है। शेखावत ने कहा था कि जांच एजेंसियों ने मुझे आरोपित नहीं माना, मेरे ऊपर झूठे आरोप लगाए गए हैं। शेखावत ने कहा था कि अशोक गहलोत ने उनकी छवि खराब करने के लिए उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए।

याचिका में कहा गया है कि अशोक गहलोत ने सार्वजनिक बयान दिया कि संजीवनी कोऑपरेटिव सोसायटी घोटाले में शेखावत के खिलाफ स्पेशल आपरेशन ग्रुप(एसओजी) की जांच में आरोप साबित हो चुका है। याचिका में कहा गया है कि मुख्यमंत्री गहलोत ने ट्वीट कर कहा कि संजीवनी कोऑपरेटिव सोसायटी ने करीब एक लाख लोगों की गाढ़ी कमाई लूट ली। इस घोटाले में करीब नौ सौ करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया गया है।

याचिका में कहा गया है कि गहलोत ने अपने ट्वीट में कहा कि ईडी को संपत्ति जब्त करने का अधिकार है न कि एसओजी को। एसओजी ने कई बार ईडी से संजीवनी कोऑपरेटिव सोसायटी की संपत्ति जब्त करने का आग्रह किया है लेकिन ईडी ने कोई कार्रवाई नहीं की जबकि ईडी विपक्ष के नेताओं पर लगातार कार्रवाई कर रही है। गहलोत ने अपने ट्वीट में शेखावत से कहा कि अगर आप निर्दोष हैं तो आगे आइए और लोगों के पैसे वापस कीजिए।

याचिका में कहा गया है कि मुख्यमंत्री गहलोत ने शेखावत का नाम एक ऐसी कोऑपरेटिव सोसाइटी के साथ जोड़कर चरित्र हनन करने की कोशिश की, जिसका न तो वे और न ही उनके परिवार का कोई सदस्य जमाकर्ता है।