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New Delhi : चीनी स्मार्टफोन कंपनी वीवो के अधिकारियों को दिल्ली हाई कोर्ट का नोटिस

तीनों अधिकारियों को कोर्ट की अनुमति के बिना देश के बाहर नहीं जाने का निर्देश
नई दिल्ली : (New Delhi)
दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने चीनी स्मार्टफोन कंपनी वीवो से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में गिरफ्तार वीवो इंडिया के अंतरिम सीईओ हांग शुकुआन ऊर्फ टेरी समेत तीन आरोपितों को रिहा करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ ईडी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए वीवो के अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा (Justice Swarnakanta Sharma) ने तीनों अधिकारियों को कोर्ट की अनुमति के बिना देश के बाहर नहीं जाने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 11 जनवरी को होगी।

कोर्ट ने तीनों अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे हर शुक्रवार और सोमवार को ईडी को रिपोर्ट करेंगे। इसके पहले 2 जनवरी को जस्टिस तुषार राव गडेला की वैकेशन बेंच ने ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि तीनों आरोपित रिहा हो चुके हैं, इसलिए उनका पक्ष सुने बिना आदेश पारित नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने इस मामले पर अगली सुनवाई 3 जनवरी को रेगुलर बेंच के पास लिस्ट करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद आज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच के पास लिस्ट हुई थी।

पटियाला हाउस कोर्ट ने 30 दिसंबर को तीनों आरोपितों की गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए रिहा करने का आदेश दिया था। ईडी ने 23 दिसंबर को वीवो इंडिया के अंतरिम सीईओ हांग शुकुआन ऊर्फ टेरी के अलावा सीएफओ हरिंदर दहिया और कंसल्टेंट हेमंत मुंजाल को गिरफ्तार किया था। एडिशनल सेशंस जज किरण गुप्ता ने प्रोडक्शन वारंट जारी करके हरिओम राय, नितिन गर्ग, राजन मलिक और गोंगवेन कुआंग को 19 फरवरी, 2024 को पेश होने का आदेश दिया है। चारों आरोपित फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

इस मामले में ईडी ने 7 दिसंबर को चार्जशीट दाखिल करके वीवो के मैनेजिंग डायरेक्टर हरिओम राय समेत चारों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपित बनाया है। ईडी के मुताबिक वीवो इंडिया ने गलत तरीके से धन हासिल किया, जो भारत की आर्थिक संप्रभुता के लिए खतरा है।

ईडी ने वीवो और उससे जुड़े लोगों पर जुलाई, 2022 में देशभर के 48 स्थानों पर छापा मारा था। ईडी ने वीवो कंपनी से जुड़ी 23 कंपनियों पर भी छापा मारा था। ईडी का दावा है कि छापे के दौरान मनी लांड्रिंग के बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ था। इस मामले में कई चीनी नागरिक और भारतीय कंपनियां शामिल हैं। करीब 62,476 करोड़ रुपये की रकम वीवो ने गैरकानूनी रूप से चीन ट्रांसफर की थी। ये रकम भारत में टैक्स से बचने के लिए चीन ट्रांसफर की गई थी।

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