
पुरुषोत्तम कनौजिया
नवी मुंबई : काफी लंबे इंतजार के बाद आखिरकार शनिवार को नवी मुंबई की एपीएमसी बाजार में अफ्रीकन हापुस पहुंच गया। जिसे खरीदने के लिए व्यापारियों में काफी उत्साह नजर आया। यह हापुस अफ्रीका के मालविका नामक देश से पिछले पांच वर्षों से भारत की बाजारों में बिकने के लिए आ रहा है। इस आम का टेस्ट, रंग और सुगंध लगभग भारतीय हापुस आम की तरह ही होता है । नवी मुंबई एपीएमसी बाजार के व्यापारी संजय पनसारे ने बताया कि करीब 12 वर्ष पहले महाराष्ट्र से हापुस आम की कलम अफ्रीका का एक किसान लेकर गया था। जिसके बाद वहां पर अब लगभग साढ़े चार सौ एकड़ में हापुस आम की बागवानी की जाती है। ऐसा इसलिए है कि वहां पर ठीक उसी तरह की मिट्टी पाई जाती है,जैसी महाराष्ट्र के कोकण प्रांत में पाई जाती हैं। वहां का वातावरण और जलवायु भी लगभग कोकण की तरह ही है।
सबसे छोटी पेटी की कीमत लगभग 3 हजार 7 सौ रुपए
महाराष्ट्र के कोकन में पैदा होनेवाला हापुस आम पूरे विश्व में प्रसिद्ध है । इसलिए वहां की सरकार ने उनके देश में भी हापुस आम की खेती करने का विचार किया था जिसके तहत वहां पर हापुस की कलम भेजी गई थी। एक पेटी में 9 से लेकर 18 तक आम आते हैं। सबसे छोटी पेटी की कीमत लगभग 3 हजार 7 सौ रुपए है। हालांकि इस साल अफ्रीकन आम कुछ देरी से बाजार में पहुंचा है। पिछले वर्षों में यह आम अक्टूबर महीने में आता रहा है इस तरह लगभग 1 महीने की देरी से यह आम नवी मुंबई की एपीएमसी बाजार पहुंचा है।


