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MUMBAI : जीवन की जटिलताओं का सम्मिश्रण है हमीदा बाई की कोठी

मुंबई : जीवन की जटिलताओं का सम्मिश्रण है हमीदा बाई की कोठी, जिसके कलाकार है उतम अभिनय के साक्षी अंकेश सिंह, हर्षा कंधारी, गौरी अरोड़ा,पूनम गौड, तुषार रावत, काशी नाथ सिंह, सिध्दांत मिसरा, आर्यन मोदी, आलोक शर्मा, हरीश ओसवाल और दीपक कुमावत और कॉस्ट्यूम डिजाइन किया है गौरी अरोड़ा ने। वहीं दूसरी ओर नाटक कोर्ट मार्शल का मंचन भी ऐक्टर ऐकपिरिएसन के द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसके लेखक स्वदेश दीपक और निर्देशक हैं अंकेश सिंह, जिसकी कहानी रंग भेद पर यानि दलित लोगों के ऊपर आधारित है। रंग भेद माने गोरा और काला, ऊंचा और नीचा, मानवीय संबंध को संकुचित करने वाला ऐसी बर्बरता है। सेना में जो आज भी कायम है, जातिवाद जनतांत्रिक मूल के विकास के रास्ते में आज भी अतीत से वर्तमान तक रोड़ा बनके अड़ियल खम्भा सा खड़ा है। ना ही देश भक्ति उसका कुछ उखाड़ पा रहा है, ना ही आधुनिक विज्ञान। आधुनिकीकरण जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से दूसरे रूढ़िवाद के साथ जातिवाद भी उतनी ही तेजी से आगे निकल गया है। देश के प्रहरी हमें अंधेरी गली में ले जा रहे हैं, आधुनिक तकनीक जीवन के बीच सेना में सामाजिक जीवन के लिए क्षेत्रीयवाद, संप्रदायवाद और जातिवादी संघर्ष के लिए सैनिक अभिशप्त है। ऐसे ही दरारों को पाटने के लिए परम्परा के एक नहीं बल्कि दो धाराए हैं। एक धारा सांस्कृतिक विरासत के नकारात्मक तत्वों को विकसित करता है और दूसरा धारा सकारात्मक सोच को प्राचीन काल से ही मानवीय और जनवादी विचारधारा के तत्व अभिव्यक्ति पाते रहे हैं। नवजागरण के साथ ऐसे ही अतिवाद के खिलाफ परंपरा और नवजागरण से इतिहास ने जो संघर्ष किया है, आज उत्पीड़न मनुष्य के लिए प्रेरणा है, ऐसे ही प्रेरणा से प्रेरित है नाटक कोर्ट मार्शल, जिसके सराहनीय कलाकार है सिद्धांत मिसरा, निशा मनचंदा, विशाल चौरसिया, आर्यन मोदी, राहुल सिंह, हरिश ओसवाल, हरप्रीत इनदर सिंह संधू , आलोक शर्मा, तुषार राव, दीपक कुमावत और कॉस्ट्यूम डिजाइन किया है गौरी अरोड़ा ने।

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