
मुंबई : (Mumbai) सेंट जॉर्ज अस्पताल (St. George Hospital) में पिछले तीन वर्षों के दौरान आईसीयू (ICU) में हुई मरीजों की मौतों के आंकड़ों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विधान परिषद में मेडिकल शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ (Legislative Council by Medical Education Minister Hasan Mushrif) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मई 2022 से जुलाई 2025 के बीच यहाँ 521 मरीजों की जान गई है। मई 2022 से जुलाई 2025 के बीच सेंट जॉर्ज अस्पताल के आईसीयू में भर्ती 521 मरीजों की मौत दर्ज की गई है। इसके अलावा, एक और चिंताजनक बात यह सामने आई कि करीब 7.8 प्रतिशत मरीज अपना इलाज पूरा किए बिना ही अस्पताल से चले गए।
आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक इंटर्न के भरोसे आईसीयू
विधान परिषद सदस्य उमा खापरे (Uma Khapre) ने डॉक्टरों की कमी का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में मंत्री ने स्पष्ट किया कि आईसीयू में विशेषज्ञ मौजूद हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि वहां आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक इंटर्न रखे गए हैं, जो असिस्टेंट प्रोफेसर (फार्माकोलॉजी) की देखरेख में काम करते हैं। सरकार ने साफ किया कि इन इंटर्न को इलाज से जुड़े स्वतंत्र फैसले लेने का अधिकार नहीं है।
‘डेथ ऑडिट’ से होगी बारीकी से जांच
अस्पताल में होने वाली हर मौत का अब ‘डेथ ऑडिट’ किया जाएगा। हर छह महीने में एक विशेष कमेटी इन मौतों का वर्गीकरण करेगी ताकि यह समझा जा सके कि मौतें बीमारी की गंभीरता के कारण हुईं या इलाज में किसी चूक की वजह से।
स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए टास्क फोर्स
मौतों की संख्या कम करने के लिए एक ‘इंस्टीट्यूशनल लेवल कमेटी’ (‘Institutional Level Committee’) बनाई गई है। इस कमेटी की सिफारिश पर अस्पताल में एक अतिरिक्त असिस्टेंट प्रोफेसर (पैथोलॉजिस्ट) की नियुक्ति की गई है। साथ ही, इन्फेक्शन कंट्रोल और मॉनिटरिंग सिस्टम को पहले से अधिक कड़ा कर दिया गया है।
बायोमेडिकल वेस्ट और इन्फेक्शन पर नकेल
अस्पताल के भीतर संक्रमण को रोकने के लिए बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के नियमों को सख्त बनाया गया है। सरकार का दावा है कि हेल्थ सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए सभी आधुनिक तरीके अपनाए जा रहे हैं ताकि भविष्य में मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके।


