कुशीनगर : विश्व पर्यटन दिवस पर बुधवार को अन्तर-राष्ट्रीय महत्व की बौद्ध तीर्थस्थली कुशीनगर में मुस्लिम बहुल देश कजाकिस्तान के पर्यटकों का दल छाया रहा। नौ सदस्यीय पर्यटकों के दल ने पूरे दिन भ्रमण कर बुद्ध से जुड़े स्थलों की ऐतिहासिकता जानी, पुरावशेष और धरोहरों को देखा। विशेषकर महापरिनिर्वाण मंदिर में बुद्ध की 5वीं सदी की शयनमुद्रा वाली प्रतिमा की खूबियां देख पर्यटक विस्मित रह गए। यूं कह लीजिए कजाकिस्तान के सैलानियों को बुद्ध का जीवन दर्शन गहरे भा गया।
पर्यटक वोलकोवा तातियान, लीना लेओनोवा, नादिया जोबासेवा, ईयाना मिलकेविच, बलेनिटीना टेलनोवा, ल्यूडमिला चेर्नोवा, स्बेनिया फ़ाडीना भ्रमण के पूर्ण व्याख्यान केंद्र में बुद्ध के जीवन वृत्त को आडियो विजुअल के माध्यम से देखा और सुना। कजाकिस्तानी पर्यटक अक्सर हिमालयन क्षेत्र का भ्रमण करने भारत आते रहते है किंतु यह पहला अवसर है जब उन्होंने किसी बौद्ध तीर्थस्थल की ओर रुख किया है।
पर्यटकों ने स्थानीय लोगों, पर्यटन कारोबारियों से बातचीत भी की और धर्म, अध्यात्म व संस्कृति को लेकर विचार भी साझा किया। बताया कि बुद्ध के संबंध में लोगों से सुना और किताबों में पढ़ा था किंतु आज उनकी भूमि पर आकर उन्हें गर्व का अहसास हो रहा है। यह अविश्वसनीय लगता है कि केवल एक व्यक्ति ने अकेले दुनिया के अनेक देशों के लोगों को शांति और अहिंसा के मार्ग पर कैसे चलना सिखाया होगा।
भारतीय पर्यटन पर पर्यटक बोले कि यहां सब कुछ है। पाक कला, कला, संस्कृति, लोकगीत, संगीत, नृत्य, परंपरा, वेशभूषा, हस्तशिल्प और मेलों और त्योहारों की समृद्ध विविधता है। वॉटर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग, ट्रैकिंग और पर्वतारोहण जैसे साहसिक पर्यटन भी है। यहां के तीर्थ स्थल और ध्यान केंद्र आध्यात्मिक सांत्वना प्रदान करते हैं। पर्यटकों के यहां पहुंचने पर उत्तरप्रदेश पर्यटन अधिकारी राजेश त्रिपाठी और प्राण रंजन ने माला पहनाकर स्वागत किया।



