
काठमांडू : (Kathmandu) नेपाल के उच्चतम न्यायालय ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (Prime Minister Balendra Shah) को अदालत की अवमानना से जुड़े मामले में उपस्थिति से छूट प्रदान कर दी है। न्यायाधीश हरि फुयाल और शान्ति सिंह थापा (Justices Hari Phuyal and Shanti Singh Thapa) की पीठ ने शाह को इस मामले में तारीख पर प्रतिनिधि भेजने की सुविधा प्रदान की है।
अब मामले की अगली तारीख पर प्रधानमंत्री शाह (Prime Minister Shah) की जगह उनका प्रतिनिधि भी अदालत में उपस्थित होकर तारीख ले सकता है। इससे पहले भी उन्होंने प्रतिनिधि रखने की मांग करते हुए आवेदन दिया था, लेकिन अदालत ने उसे अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद से वह अवमानना के मामले में हर तारीख पर स्वयं उपस्थित होते रहे थे।
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने जब वह काठमांडू महानगरपालिका के मेयर थे, तब हिन्दी फिल्म ‘आदिपुरुष’ में ‘जानकी भारत की बेटी हैं’ संवाद को हटाए बिना फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की घोषणा की थी। नेपाल चलचित्र संघ (an organization of cinema hall operators) ने महानगर के इस फैसले के खिलाफ पाटन उच्च अदालत में रिट याचिका दायर की थी।
उस याचिका में मेयर शाह, सिटी पुलिस, गृह मंत्रालय और संचार तथा सूचना मंत्रालय को विपक्ष बनाया गया था। पाटन उच्च अदालत ने महानगर के फैसले के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी करते हुए काठमांडू महानगर (Kathmandu Metropolitan City) के भीतर हिन्दी फिल्मों के प्रदर्शन की अनुमति दे दी थी।
उसी दिन शाह ने सोशल मीडिया पर संघीय सरकार और अदालत को ‘भारतीय गुलाम’ कहा था। अदालत के आदेश पर असंतोष जताते हुए उन्होंने कानून और अदालत के आदेश का पालन न करने की बात भी कही थी।


