
भोपाल : (Bhopal) मध्य प्रदेश के मितावली स्थित 64 योगिनी मंदिर पर बनी कलाकार एवं साधक डॉ. बीना उन्नीकृष्णन (Dr. Bina Unnikrishnan) की डॉक्यूमेंट्री ‘वाय 64- व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन’ (Y64 – Whispers of the Unseen’) का मुम्बई में आयोजित 19वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (एमआईएफएफ) 2026 में प्रदर्शन हुआ।
मुम्बई में 15 से 21 जून तक आयोजित समारोह में भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) के अतिरिक्त सचिव प्रभात ने रविवार काे डॉ. बीना उन्नीकृष्णन एवं उनकी टीम को सम्मानित किया। कार्यक्रम में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार दीपक नारायण, एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर दीप्ति चावला, सिनेमैटोग्राफर प्रदीप सहित अन्य अतिथियों की उपस्थिति रही।
जनसम्पर्क अधिकारी अनुराग उइके (Public Relations Officer Anurag Uike) ने सोमवार को बताया कि मप्र के संस्कृति विभाग एवं काली ट्रस्ट के सहयोग से निर्मित यह डॉक्यूमेंट्री अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए पहली बार प्रदर्शित की गई। मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा फिल्म समारोह है। यह विशेष रूप से वृत्तचित्र, लघु कथा और एनीमेशन फिल्मों को समर्पित है।
हमारी पुरातन स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं 64 योगिनी मंदिर: अपर मुख्य सचिव
मध्य प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि मध्य प्रदेश के मितावली (मुरैना), जबलपुर और खजुराहो के 64 योगिनी मंदिर हमारी पुरातन स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। मितावली का 64 योगिनी मंदिर, जिसने भारत की पुरानी संसद भवन की वास्तुकला को प्रेरित किया, यह आज यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की अस्थायी सूचि में भी शामिल है। डॉक्यूमेंट्री ‘वाय 64- व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन’ जैसी परियोजना इस अद्वितीय विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचा रही है। डॉ. बीना उन्नीकृष्णन की कलात्मक यात्रा के माध्यम से यह फिल्म युवाओं को भारत की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए सृजनशीलता, साहस, आत्म-अन्वेषण और स्त्री शक्ति जैसे सार्वभौमिक मूल्यों से परिचित कराती है।
64 योगिनियों ने मुझे इस कार्य के लिए चुना, यह मेरा सौभाग्य : डॉ. बीना उन्नीकृष्णन
डॉ. बीना उन्नीकृष्णन ने बताया कि लगभग साढ़े बारह वर्ष पूर्व उन्होंने 64 योगिनियों के चित्रांकन की प्रक्रिया को केवल एक दस्तावेज़ के रूप में संजोने की शुरुआत की थी, लेकिन समय के साथ यह प्रयास समर्पण, धैर्य और आत्म-परिवर्तन की प्रेरणादायक सिनेमाई यात्रा बन गया। इस वर्ष उन्होंने 64 मूल चित्रों के साथ भारत के 14 शहरों में लगभग 15,000 किलोमीटर की सड़क यात्रा कर हजारों लोगों को योगिनी परंपरा से परिचित कराया तथा कला, संस्कृति और अध्यात्म पर व्यापक संवाद स्थापित किया।
उन्होंने कहा कि जब मैंने यह यात्रा शुरू की थी, तब मैं केवल उत्तर खोजती एक कलाकार थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह एक पुस्तक, प्रदर्शनी, हजारों किलोमीटर की यात्रा और अंततः एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का रूप ले लेगी। योगिनियों ने मुझे भय से परे जाना और अपने स्त्रीत्व तथा अदृश्य मार्ग पर विश्वास करना सिखाया। मैं हमेशा कहती हूँ कि मैंने योगिनियों को नहीं चुना, बल्कि योगिनियों ने मुझे चुना है। उन्होंने बताया कि यह डॉक्यूमेंट्री केवल योगिनी मंदिरों के इतिहास और रहस्य को नहीं, बल्कि आध्यात्मिक आह्वान को पूरा करने के लिए आवश्यक साहस और समर्पण की कहानी भी प्रस्तुत करती है। इस उपलब्धि के लिए उन्होंने मध्यप्रदेश पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया।
विरासत और संस्कृति का अद्भुत संगम है फिल्म
64 योगिनी मंदिरों से प्रेरित यह अनूठी फिल्म, संस्कृति, अध्यात्म और विरासत का अद्भुत संगम है। कंकाली ट्रस्ट और मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से निर्मित यह डॉक्यूमेंट्री भारत के योगिनी मंदिरों से जुड़ी समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का उत्सव भी है। यह डॉक्यूमेंट्री दर्शकों को ऐसे संसार में ले जाती है, जहाँ कला, आस्था, इतिहास और आत्म-परिवर्तन एक-दूसरे से जुड़कर एक अद्वितीय अनुभव का निर्माण करते हैं।





