
मनपा में कुल 4189 पदों की मंजूरी, मौजूदा समय में 3273 कर्मचारी ही कार्यरत
भिवंडी : (Bhiwandi) भिवंडी मनपा (Bhiwandi Municipal Corporation) में इन दिनों कुल 916 पद रिक्त पड़े हैं, जिनमें वर्ग-1 से लेकर वर्ग-4 तक के कर्मचारियों के पद शामिल हैं। अनेक वर्षों से भर्ती नहीं होने के कारण वर्ग-3 और वर्ग-4 (Class-3 and Class-4 employees) के कर्मचारियों को प्रभारी अधिकारी के पद पर नियुक्त कर प्रशासनिक कामकाज चलाया जा रहा है। सफाई कर्मचारी भी प्रभारी अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। मनपा में प्रभाग समितियों के अलावा अधिकांश महत्वपूर्ण पदों का कार्यभार प्रभारियों के हवाले है। इसके कारण न केवल मनपा का कामकाज प्रभावित हो रहा है, बल्कि भ्रष्टाचार बढ़ने की भी शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि मनपा आयुक्त (Municipal Commissioner) द्वारा सरकार से योग्य अधिकारियों की मांग करने के बजाय अयोग्य कर्मचारियों को पदोन्नति देकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। इससे मनपा की व्यवस्था रामभरोसे चलने की स्थिति में पहुंच गई है।
अधिकांश प्रमुख पदों पर प्रभारी अधिकारी तैनात
मनपा के स्थापना विभाग (corporation’s establishment department) के अनुसार, इन दिनों अधिकांश प्रमुख पद प्रभारी अधिकारियों के हवाले हैं। यहां केवल नाममात्र के स्थायी अधिकारी कार्यरत हैं। आंकड़ों के अनुसार आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त, दो उपायुक्त, सहायक नगर रचनाकार, मुख्य लेखा परीक्षक, मुख्य वित्त अधिकारी, शहर अभियंता और वैद्यकीय अधिकारी (Commissioner, Additional Commissioner, two Deputy Commissioners, Assistant Town Planner, Chief Auditor, Chief Finance Officer, City Engineer, and Medical Officer) सहित केवल नौ पदों पर नियमित अधिकारी कार्यरत हैं। इनके अलावा अधिकांश प्रमुख पदों पर प्रभारी अधिकारी कार्य कर रहे हैं। कई मामलों में अनुभवहीन अथवा अयोग्य कर्मचारियों को वरिष्ठ अधिकारियों की कृपा से उच्च पदों की जिम्मेदारी दी गई है।
1996 के बाद नहीं हुई पदोन्नति, कर्मचारियों में बढ़ रहा असंतोष
मनपा में वर्ष 1996 के बाद से किसी भी कर्मचारी की नियमित पदोन्नति नहीं हुई है। शासन के नियमानुसार वर्ग-1 के पदों पर शासकीय और मनपा सेवा के अधिकारियों का संतुलन होना चाहिए, लेकिन यहां कर्मचारी वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा में प्रभारी भूमिका निभा रहे हैं। स्थायी अधिकारियों की भारी कमी, वर्षों से रुकी पदोन्नतियां और सैकड़ों रिक्त पदों ने मनपा प्रशासन की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लिपिकों और अन्य कर्मचारियों के सैकड़ों पद खाली
मनपा में स्वीकृत 45 वरिष्ठ लिपिक पदों में से सभी पद रिक्त हैं। इसके अलावा कनिष्ठ लिपिकों के 433 पदों में से 188 पद खाली पड़े हैं, जिससे कार्यालयीन कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कई कर्मचारी प्रभारी के रूप में अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन उन्हें वेतन मूल पद के अनुसार ही मिल रहा है। इससे कर्मचारियों में असंतोष और मानसिक तनाव बढ़ता जा रहा है।
शिक्षणाधिकारी से लेकर प्रभाग अधिकारियों तक के पद खाली
मनपा में कर मूल्यांकन अधिकारी, विधि अधिकारी, नगर सचिव, स्थापना विभाग प्रमुख, शहर विकास अधिकारी तथा पांचों प्रभाग समितियों के प्रभारी अधिकारियों के पद प्रभारियों के भरोसे हैं। पिछले 22 वर्षों से मनपा में शिक्षणाधिकारी का पद खाली है और संबंधित विभाग प्रशासन अधिकारी की देखरेख में चल रहा है। इसके अलावा पांचों प्रभागों में प्रभाग अधिकारी के पद पर सफाईकर्मियों अथवा लिपिकों को अतिरिक्त प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है। कुल मिलाकर मनपा के अधिकांश प्रमुख पद खाली हैं और प्रशासन प्रभारियों के सहारे संचालित हो रहा है।
योग्य अधिकारियों की कमी से विकास कार्य प्रभावित
स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्याप्त योग्यता और अधिकार नहीं होने के कारण कई प्रभारी अधिकारी स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। इसके चलते प्रशासनिक कार्यों में देरी हो रही है, भ्रष्टाचार बढ़ रहा है और विकास कार्य बाधित हो रहे हैं। नागरिकों का आरोप है कि मनपा प्रशासन की स्थिति पूरी तरह अव्यवस्थित हो चुकी है।
सरकार नहीं कर रही अधिकारियों की मांग पूरी
मनपा आयुक्त अनमोल सागर (Municipal Commissioner Anmol Sagar) का कहना है कि प्रशासन के पास कर्मचारियों की भारी कमी है। बार-बार मांग करने के बावजूद सरकार की ओर से मनपा को पर्याप्त अधिकारी और कर्मचारी उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। इसी कारण कर्मचारियों को पदोन्नति देकर प्रभारी का कार्यभार सौंपकर काम चलाया जा रहा है।




