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रोजाना एक कविता : 1, नागार्जुन की कविता – गुड़ मिलेगा

एक छोटी कविता नागार्जुन की पढ़ें। यह कविता खामोशी और चुप्पियों के बारे में है। यह कविता जो कुछ हो रहा है उसे बस देखने और स्वीकार करने के बारे में है । यह कविता सत्ता के सार्वभौम दुर्गुण चाटुकारिता पसंदगीं के बारे में है। यह कविता है –

गूंगा रहोगे
गुड़ मिलेगा

रुत हँसेगी
दिल खिलेगा
पैसे झरेंगे
पेड़ हिलेगा
सिर गायब,
टोपा सिलेगा

गूंगा रहोगे
गुड़ मिलेगा

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