
मुंबई/नई दिल्ली : (Mumbai/New Delhi) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) (Reserve Bank of India’s (RBI) Monetary Policy Committee (MPC)) की तीन दिवसीय द्विमासिक समीक्षा बैठक बुधवार से शुरू हो गई। बैठक की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा (RBI Governor Sanjay Malhotra) कर रहे हैं, जबकि नीतिगत फैसलों की घोषणा 5 जून को की जाएगी।
बाजार विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्रीय बैंक इस बार भी रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रख सकता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ऊर्जा कीमतों में उछाल और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को इसके प्रमुख कारणों के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें, रुपये पर दबाव और आपूर्ति शृंखला से जुड़ी चुनौतियां मुद्रास्फीति के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। ऐसे में आरबीआई ब्याज दरों में बदलाव के बजाय हालात पर नजर बनाए रखने की रणनीति अपना सकता है।
अप्रैल की पिछली मौद्रिक समीक्षा में भी आरबीआई ने ‘देखो और इंतजार करो’ (‘wait-and-watch’) का रुख अपनाते हुए रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा था। तब केंद्रीय बैंक ने महंगाई, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक वृद्धि पर वैश्विक घटनाक्रमों के प्रभाव का आकलन करने की जरूरत बताई थी।
अब वित्तीय बाजारों और उद्योग जगत की निगाहें 5 जून पर टिकी हैं, जब गवर्नर संजय मल्होत्रा एमपीसी के फैसलों के साथ महंगाई, विकास दर और मौद्रिक नीति के भविष्य के संकेत भी साझा करेंगे।


