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Mumbai : मराठा आरक्षण को लेकर फिर आक्रामक हुए जरांगे सरकार से मांगा लिखित आश्वासन

Mumbai: Jarange Turns Aggressive Again Over Maratha Reservation Issue
Demands Written Assurance from the Government

मुंबई : (Mumbai) मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे (Manoj Jarange) एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाते नजर आ रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि कुणबी समाज (Kunbi community) से संबंधित मिले 58 लाख रिकॉर्ड्स के आधार पर सभी पात्र लोगों को तुरंत प्रमाण पत्र वितरित किए जाएं। जरांगे ने मराठा समाज की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए एक स्वतंत्र मंत्रालय स्थापित करने की भी मांग की। उनका कहना है कि पूर्व सरकारों ने मराठा समाज के हितों की अनदेखी की है, इसलिए अब ठोस निर्णय लेने की जरूरत है।

आंदोलन से पहले सरकार के साथ हुई चर्चा
30 मई से जालना जिले के अंतरावली सराटी (May 30 in Antarwali Sarati) में प्रस्तावित आंदोलन की पृष्ठभूमि में राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे से मुलाकात की। इस शिष्टमंडल में मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और विधायक प्रसाद लाड (Radhakrishna Vikhe Patil and MLA Prasad Lad) शामिल थे। बैठक के दौरान जरांगे ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से मराठवाड़ा में मिली प्रविष्टियों के आधार पर प्रमाण पत्र जारी नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) का नाम लेते हुए कहा कि यदि हैदराबाद गजट पर आदेश जारी कर दिए जाएं तो अगले ही दिन से कुणबी प्रमाण पत्र वितरण शुरू हो सकता है। सरकार की ओर से राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि राज्य में अब तक 39 लाख कुणबी प्रमाण पत्र वितरित किए जा चुके हैं और सरकार इसकी पारदर्शी सूची देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि 1994 की सरकारों की नीतियों के कारण मराठा समाज को ओबीसी में शामिल नहीं किया गया था। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि हैदराबाद गजट (‘Hyderabad Gazette’) का मामला फिलहाल न्यायालय में लंबित है और उस पर स्थगन आदेश लागू है। सरकार का कहना है कि यदि इस समय सतारा गजट लागू किया गया तो उसे भी कानूनी चुनौती मिल सकती है।

मनोज जरांगे की सरकार को चेतावनी
मनोज जरांगे ने सरकार से लिखित आश्वासन मांगा है कि प्रविष्टियों के आधार पर प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया किसी भी परिस्थिति में नहीं रोकी जाएगी। उन्होंने कहा कि वे अपने आंदोलन के निर्णय पर कायम हैं और जब तक मराठा समाज को उसका अधिकार नहीं मिलता, तब तक पीछे नहीं हटेंगे।

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