
मुंबई : (Mumbai) देश में ईंधन की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी का असर अब स्कूल बस सेवाओं पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। महाराष्ट्र में जून से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से पहले स्कूल बस मालिक संघ ने फीस बढ़ाने की चेतावनी दी है। महाराष्ट्र स्कूल बस मालिक संघ (Maharashtra School Bus Owners’ Association states) का कहना है कि लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण बस संचालकों पर भारी आर्थिक दबाव बन गया है। संघ के अनुसार रखरखाव खर्च, बीमा प्रीमियम, परमिट शुल्क और कर्मचारियों के वेतन में पहले ही बढ़ोतरी हो चुकी है। ऐसे में अब ईंधन की कीमतों में लगातार इजाफे से परिवहन शुल्क में संशोधन करना मजबूरी बन सकता है।
सरकार से हाइब्रिड मॉडल की मांग
संघ ने सरकार से स्कूलों को हाइब्रिड मोड में संचालित करने की अनुमति देने की मांग की है। इसके तहत छात्रों को हर दिन स्कूल बुलाने के बजाय वैकल्पिक दिनों में स्कूल आने की व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया है। संघ का कहना है कि इससे स्कूल बसों की आवाजाही कम होगी और ईंधन की खपत में कमी आएगी।
सिंगल शिफ्ट सिस्टम का भी सुझाव
स्कूल बस मालिक संघ (School Bus Owners’ Association) ने स्कूलों में सिंगल शिफ्ट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम लागू करने का सुझाव भी दिया है। संघ के मुताबिक कई स्कूलों में अलग-अलग शिफ्ट होने के कारण बसों को छात्रों को लाने-ले जाने के लिए कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। अगर शिफ्टों को कम किया जाए तो बसों के फेरे कम होंगे और परिचालन खर्च घटाया जा सकेगा।
40 हजार बसों के लिए रोज चाहिए भारी ईंधन
संघ के अध्यक्ष अनिल गर्ग (Anil Garg) ने बताया कि संगठन से जुड़ी करीब 40 हजार स्कूल बसों को चलाने के लिए प्रतिदिन 1.2 लाख लीटर से अधिक ईंधन की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी कर रही है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इसकी सीमा क्या होगी। ऐसे में स्कूल खुलने से पहले फीस तय करना और अभिभावकों को जानकारी देना बस संचालकों के लिए मुश्किल हो गया है। संघ ने कहा कि वह अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने से बचना चाहता है। हालांकि यदि ईंधन की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो स्कूल बस फीस (school bus fees) बढ़ाना अपरिहार्य हो सकता है।


