
काठमांडू : (Kathmandu) नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (Unified Marxist-Leninist) (Unified Marxist-Leninist) में पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली (former Prime Minister K.P. Sharma Oli) के नेतृत्व को अब खुल कर नकारा जा रहा है और पार्टी के बड़े पदाधिकारियों ने नेतृत्व परिवर्तन की मांग की है।
शनिवार को पार्टी की एक संगठनात्मक बैठक के दौरान कई बड़े अधिकारियों ने अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली से इस्तीफे की मांग की। बताया गया है कि नेकपा-एमाले पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में चार बड़े पदाधिकारियों ने ओली को पद छोड़ने की सलाह दी है।
यह पहली बार है जब ओली से पार्टी पदाधिकारी और उनके करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की खुलकर मांग उठाई। नेपाल में जेन जी विद्रोह के बाद और चुनाव परिणाम आने के बाद से छिटपुट तरीके से उनके इस्तीफे की मांग की जाती रही है।
बताया गया है कि गत 5 मार्च के चुनाव के बाद ओली निवास में शुक्रवार से शुरू हुई पदाधिकारियों की बैठक के दूसरे दिन शनिवार को उपाध्यक्ष राम बहादुर थापा, विष्णु पौडेल (Vice-Chairmen Ram Bahadur Thapa and Bishnu Paudel), महासचिव शंकर पोखरेल और पृथ्वी सुब्बा गुरूंग ने नेतृत्व परिवर्तन का मुद्दा उठाते हुए ओली से इस्तीफे की मांग की। पार्टी के 11वें महाधिवेशन में ओली का मजबूती से समर्थन करने वाले इन नेताओं ने कहा कि अब एमाले को नए नेतृत्व की दिशा की आवश्यकता है। बैठक के दौरान पौडेल ने नेतृत्व पदों के लिए आयु सीमा और दो कार्यकाल की व्यवस्था हटाने के पार्टी निर्णय पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा नेतृत्व शैली के तहत पार्टी आगे नहीं बढ़ सकती।
पौडेल ने कहा, “पार्टी इस तरह नहीं चल सकती। नेतृत्व सहित हम सभी को खुद को सुधारना होगा, अन्यथा पार्टी पतन की ओर बढ़ेगी।” उन्होंने यह भी कहा कि 21 फरवरी के चुनाव और 8 तथा 9 सितंबर 2025 के प्रदर्शनों के बाद नेपाल की राजनीतिक परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं और एमाले पुरानी कार्यशैली के साथ आगे नहीं बढ़ सकती।
इसी तरह गुरुङ ने कहा कि एमाले किसी की निजी कंपनी नहीं है और ओली अनिश्चितकाल तक अध्यक्ष पद पर नहीं बने रह सकते। गुरुङ की इस टिप्पणी से ओली स्पष्ट रूप से नाराज हो गए, जिसके बाद बैठक में दोनों नेताओं के बीच तनावपूर्ण बहस हुई।
पार्टी के सचिव महेश बस्नेत (Party Secretary Mahesh Basnet) ने कहा, “जो नेता लंबे समय तक ओली के साथ खड़े रहे, जब वही दूरी बनाने लगे तो ओली निराश और गुस्से में दिखाई दिए। गुरुङ द्वारा एमाले को निजी कंपनी नहीं बताए जाने के बाद चर्चा कुछ समय के लिए गर्मा गई।”
ओली ने यह चेतावनी भी दी कि कठिन समय में पार्टी का समर्थन न करने वाले नेताओं को भविष्य में जिम्मेदारियों के बंटवारे के दौरान परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। पार्टी सचिवालय की बैठक में सहभागी अधिकांश पदाधिकारियों का कहना है कि 11वें महाधिवेशन में जिन नेताओं को शीर्ष पदों तक पहुंचाने में ओली की महत्वपूर्ण भूमिका रही, उन्हीं नेताओं से आलोचना सुनकर वह निराश दिखाई दिए।


