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Dehradun : चढ़ावे के पैसे से वीआईपी मेहमाननवाजी, बीकेटीसी पर आरटीआई से खुलासा

Dehradun: VIP Hospitality Funded by Devotee Offerings—RTI Reveals Misuse at BKTC

भाजपा से जुड़े लोगों को दी गई विशेष सुविधाएं, प्रधानमंत्री के भाई पंकज मोदी भी शामिल
देहरादून : (Dehradun)
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (Badrinath-Kedarnath Temple Committee) (BKTC) में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर नया विवाद सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने सूचना के अधिकार (Right to Information) (RTI) से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाया है कि मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं के दान-चढ़ावे के धन का उपयोग वीआईपी मेहमाननवाजी, आवास, भोजन और हेलीकॉप्टर टिकटों पर किया।

अधिवक्ता नेगी के अनुसार बीकेटीसी की ओर से कई राजनीतिक और अन्य व्यक्तियों को ‘अतिथि’ दर्शाकर उनके आवास और भोजन पर लाखों रुपये खर्च किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े लोगों को विशेष सुविधाएं प्रदान की गईं।

जारी आरोपों के अनुसार कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की पुत्री नेहा जोशी (Neha Joshi—daughter of Cabinet Minister Ganesh Joshi) के दो दिन के आवास एवं भोजन पर लगभग 60 हजार रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल (Kedarnath MLA Asha Nautiyal) के नाम पर 37,500 रुपये, प्रधानमंत्री मोदी के भाई पंकज मोदी के लिए 22 हजार रुपये सहित अन्य भाजपा पदाधिकारियों के आवास पर भी हजारों रुपये खर्च किए जाने का दावा किया गया है।

अधिवक्ता नेगी ने आरोप लगाया कि बीकेटीसी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारियों के अतिथियों के हेलीकॉप्टर टिकटों का भुगतान भी मंदिर कोष से किया गया। उन्होंने कहा कि पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज (Tourism Minister Satpal Maharaj), बीकेटीसी अध्यक्ष और मुख्य कार्याधिकारी के अतिथि बताकर कई अन्य लोगों के आवास एवं भोजन पर भी भारी राशि खर्च की गई।

उन्होंने वित्तीय अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। नेगी ने कहा कि बदरीनाथ और केदारनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं और दान-चढ़ावे के धन का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

गौरतलब है कि अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी (Advocate Vikesh Singh Negi) पूर्व में भी आरटीआई के माध्यम से बीकेटीसी से जुड़े कई मामलों को उजागर कर चुके हैं। इनमें एक उपाध्यक्ष पर कथित रूप से अपनी पत्नी को कर्मचारी दिखाकर भुगतान लेने और मंदिर कोष से धन वितरण से जुड़े आरोप शामिल रहे हैं।

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