
नई दिल्ली : (New Delhi) खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थ देने के साथ इनकी तस्करी और वितरण को अपराध की श्रेणी में लाने के लिए राष्ट्रीय डोपिंग रोधी कानून (National Anti-Doping Law) में फिर बदलाव किया जाएगा। इसके तहत ‘सप्लायर्स’ (‘suppliers’) को पांच साल तक की जेल भी हो सकती है। साथ ही, खिलाड़ियों को जान-बूझकर प्रतिबंधित दवाएं लिखने वाले डॉक्टरों को भी नहीं बख्शा जाएगा।
सुझाव की प्रक्रिया
मंत्रालय ने सुझाव मांगे : जनता से प्रतिक्रिया मांगने के लिए ये संशोधन खेल मंत्रालय की वेबसाइट (Ministry of Youth Affairs and Sports’ website) पर डाले गए हैं। सुझाव देने की आखिरी तारीख 18 जून है। खेल मंत्री मनसुख मंडाविया (Sports Minister Mansukh Mandaviya) ने गुरुवार को कहा कि यह संशोधित विधेयक सुझावों पर गौर करने के बाद बिना देरी के संसद के अगले सत्र में लाया जाएगा।संशोधन के अनुसार, खिलाड़ी को डोपिंग के उद्देश्य से या उसके संबंध में कोई प्रतिबंधित पदार्थ देता है तो उसे पांच साल तक कारावास या दो लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
खिलाड़ियों की सुरक्षा
खिलाड़ियों की सुरक्षा : मंडाविया ने पत्रकारों से कहा कि वर्तमान में डोपिंग उल्लंघन में खिलाड़ियों को सजा, अयोग्य करार देना या पदक वापस लेने तक ही सीमित है लेकिन अब प्रतिबंधित पदार्थो की संगठित आपूर्ति को अपराध घोषित करना जरूरी है। उन्होंने कहा, हम डोपिंग करने वालों को सजा देते हैं लेकिन प्रतिबंधित दवाओं की आपूर्ति करने वालों को भी निशाना बनाया जाना चाहिए। वह कोच हो, मैनेजर, खिलाड़ी या ऐसा कोई भी जिसकी खिलाड़ी तक सीधे पहुंच है। अगर ये संशोधन हो जाता है तो इस आपूर्ति नेटवर्क का हिस्सा पाए जाने वाले सभी अपराधी की श्रेणी में आएंगे।
चिंता की बात
चिंता की बात : तीन साल से डोपिंग उल्लंघन के मामलों में वाडा की वैश्विक सूची में शीर्ष पर मौजूद भारत ओलंपिक 2036 की मेजबानी का इच्छुक है और 2030 राष्ट्रमंडल खेलों का मेजबान भी है। लेकिन डोपिंग के खराब रिकॉर्ड का विपरीत असर भारत की ओलंपिक मेजबान बनने की महत्वाकांक्षा पर पड़ सकता है।
नए प्रस्तावित संशोधन
-जो प्रतिबंधित दवाएं लिखते हैं यानी कोई डॉक्टर डोपिंग में जान बूझकर शामिल होता है तो वह भी इसके लिए जवाबदेह होगा।
-सिर्फ डोपिंग रोधी नियम के उल्लंघन या पॉजीटिव टेस्ट के आधार पर खिलाड़ी को अपराधी नहीं ठहराया जाएगा।
-खिलाड़ियों से जुड़े खेलों में उल्लंघन के मामले वर्तमान डोपिंग रोधी ढांचे के तहत ही रहेंगे।
-संशोधन का उद्देश्य अवैध आपूर्ति करने वालों, संगठित गिरोहों, दोषी सहयोगी स्टाफ, तस्करों और खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थ देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना है।
-यह कानून उन दवाओं के लिए छूट देगा जो उन खिलाड़ियों को लिखी गई हैं जिनके पास प्रमाणित चिकित्सीय स्थितियों से निपटने की छूट है और उन डॉक्टरों के लिए भी जो आपात स्थितियों से निपट रहे हैं।


