
नई दिल्ली : (New Delhi) पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स (global rating agency Moody) ने 2026 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 0.8 फीसदी घटाकर छह फीसदी कर दिया है। यह कटौती निजी खपत और औद्योगिक गतिविधियों में सुस्ती के साथ-साथ ऊंची ऊर्जा लागत के कारण की गई है।
वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स ने मंगलवार को जारी अपनी ‘ग्लोबल मैक्रो आउटलुक’ (Global Macro Outlook) के मई संस्करण में कहा है कि अगले छह महीनों में ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी तथा ईंधन एवं उर्वरक की कमी का असर विभिन्न देशों में अलग-अलग होगा जो उनकी निर्भरता तथा लचीलेपन पर निर्भर करेगा। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि वैश्विक परिदृश्य अत्यधिक अनिश्चित बना हुआ है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की स्थिति नाजुक है। ऐसे में हम भारत के लिए वृद्धि दर में करीब 0.8 प्रतिशत अंक तक की गिरावट का अनुमान लगाते हैं।
इसके अलावा मूडीज रेटिंग्स ने 2027 (कैलेंडर वर्ष) के लिए भी भारत की सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product) (GDP) की वृद्धि दर के अनुमान को 0.5 फीसदी अंक घटाकर छह फीसदी कर दिया है। एजेंसी के अनुसार ऊर्जा आपूर्ति में सुधार और शिपिंग प्रवाह के सामान्य होने के साथ ये दबाव धीरे-धीरे कम होंगे एवं आर्थिक गतिविधियां सुधरेंगी। मूडीज रेटिंग ने इसके साथ ही कहा कि भारत ऊंची तेल कीमतों के प्रति ‘‘विशेष रूप से संवेदनशील’’ है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 90 फीसदी आयात करता है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।


