
नई दिल्ली : (New Delhi) दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली आबकारी घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Chief Minister Arvind Kejriwal) और 22 आरोपितों को ट्रायल कोर्ट से बरी करने के आदेश को केंद्रीय जांच ब्यूरो (Central Bureau of Investigation’s) (CBI) के चुनौती दिए जाने पर आज सुनवाई टाल दी। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 11 मई को करने का आदेश दिया।
इस मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक (Arvind Kejriwal, Manish Sisodia, and Durgesh Pathak) ने सुनवाई का बहिष्कार करने का फैसला किया है। तीनों ने न तो खुद और न ही किसी वकील के जरिये कोई दलील रखने की बात कही है। तीनों ने उच्च न्यायालय को पत्र लिखकर कहा है कि उन्हें जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर भरोसा नहीं है, इसलिए वे सत्याग्रह करेंगे। इसके बाद जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ ने 5 मई को कहा था कि इस मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने कोर्ट की सुनवाई का बहिष्कार करने का फैसला किया है, ऐसे में तीन एमिकस क्यूरी नियुक्त किए जाएंगे।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा (Justice Swarana Kanta Sharma) ने 20 अप्रैल को दिल्ली आबकारी मामले में बरी करने के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई से हटने की अरविंद केजरीवाल की मांग को खारिज कर दी थी। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा था कि मैं इस आरोप से प्रभावित हुए बिना ही अपना फैसला सुनाउंगी, ठीक वैसे ही जैसा कि मैं ने अपने 34 वर्षों के न्यायिक करियर में हमेशा किया है।
कोर्ट ने कहा था कि न्यायपालिका और संस्था को ट्रायल पर रखा गया। मैंने विवाद को सुलझाने का मार्ग चुना है। न्यायपालिका की शक्ति, आरोपों पर निर्णय लेने के उसके दृढ़ संकल्प में निहित है। मैंने ये आदेश बिना किसी चीज से प्रभावित हुए लिखा है। जस्टिस शर्मा ने कहा था कि मैं हिन्दी में आदेश जारी करुंगी क्योंकि दलीलें भी हिन्दी में दी गयीं। कोर्ट ने कहा कि मैं वो उदाहरण दे रही हूं जहां पर अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के नेताओं को पहली डेट पर राहत दी गई। कोर्ट ने एक आदेश का हवाला दिया जिसमें केजरीवाल के पक्ष में एकतरफा आदेश जारी किया गया।
दरअसल, अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच पर सवाल उठाते हुए सुनवाई से हटने की मांग की थी। केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा (Justice Swarana Kanta Sharma) को मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने की मांग करते हुए कहा था कि जिस तरह से अब तक इस मामले में अदालती कार्यवाही हुई है, उससे उन्हें निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं दिख रही है। केजरीवाल ने कहा था कि बिना पक्ष सुने सेशन कोर्ट के आदेश को गलत बताया। उन्होंने कहा था कि 9 मार्च को जब उच्च न्यायालय में पहली सुनवाई हुई, तो वहां 23 में से एक भी आरोपित मौजूद नहीं था। कोर्ट में सिर्फ सीबीआई मौजूद थी। लेकिन जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने पहली ही सुनवाई में बिना दूसरी पक्ष की दलीलें सुने यह कह दिया कि ‘प्रथम दृष्टया’ सेशंस कोर्ट का आदेश गलत लगता है। बिना रिकॉर्ड मंगवाए और बिना दलीलें सुने कोर्ट इस नतीजे पर कैसे पहुंच गया।


