
रांची : (Ranchi) गुमला से वर्ष 2018 (Gumla in 2018) में लापता हुई छह वर्षीय बच्ची के मामले में झारखंड उच्च न्यायालय (Jharkhand High Court) ने सुनवाई के दौरान गुमला पुलिस की कार्यप्रणाली (functioning of the Gumla Police) पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि करीब सात साल बीत जाने के बाद भी बच्ची का पता नहीं चल पाना पुलिस की लापरवाही को दर्शाता है।
न्यायालय ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या बच्ची को ढूंढने के लिए पुलिस को एक और साल चाहिए? अदालत ने यह भी कहा कि तमाम प्रयासों के बावजूद कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आना गुमला पुलिस की जांच में गंभीर कमी को उजागर करता है। अदालत ने यह संकेत भी दिया कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो मामले को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) (Central Bureau of Investigation) को सौंपा जा सकता है।
सुनवाई के दौरान अदालत के आदेश पर गुमला के पुलिस अधीक्षक (एसपी), विशेष जांच दल (एसआईटी) (Superintendent of Police (SP) of Gumla, the head of the Special Investigation Team) के प्रमुख और जांच अधिकारी उपस्थित हुए। झारखंड सरकार की ओर से बताया गया कि नई गठित एसआईटी की तीन टीमें बच्ची की तलाश में मुंबई, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और जम्मू तक गई हैं। टीमों के लौटने के बाद अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि इसके अलावा, साउथ ईस्टर्न रेलवे से भी बच्ची के संभावित यात्रा रिकॉर्ड की जानकारी मांगी गई है, ताकि उसकी वर्तमान स्थिति का पता लगाया जा सके। सरकार ने अदालत से इन जानकारियों के आने तक अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की (Justice Sujit Narayan Prasad) अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई।
गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में भी अदालत ने स्पष्ट किया था कि यदि जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं होती है, तो मामला सीबीआई को सौंपा जा सकता है। उस समय पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा (Director General of Police (DGP) Tadasha Mishra) भी वर्चुअल माध्यम से अदालत में उपस्थित हुई थीं और उन्हें जांच की स्थिति की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया था।
दरअसल, यह मामला सितंबर 2018 से लापता बच्ची की मां चंद्रमुनि उराइन द्वारा दायर हेबियस कॉर्पस (Habeas Corpus) याचिका से जुड़ा है। पूर्व में अदालत को बताया गया था कि इस मामले की गहन जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी, जिसने दिल्ली सहित कई स्थानों पर जांच की। हालांकि अब तक बच्ची का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में एसआईटी की कार्रवाई के दौरान नौ अन्य लापता बच्चों को बरामद किया गया था, लेकिन संबंधित बच्ची अब भी लापता है।


