
नई दिल्ली : (New Delhi) केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुनराम मेघवाल (Arjun Ram Meghwal) ने गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े तीन अहम विधेयकों पर चर्चा के दौरान कहा कि यह दिन संसदीय इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगा। इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को समय पर राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाकर 815 की जाएगी, जिनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। राज्य की मौजूदा ताकत कम नहीं होगी और पुरुष वर्ग को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। महिलाओं के लिए आरक्षण अतिरिक्त सीटों पर लागू होगा और अनुसूचित जाति-जनजाति की महिलाओं के लिए भी एक-तिहाई हिस्सा सुनिश्चित किया जाएगा।
मेघवाल ने संसद के विस्तारित बजट अधिवेशन की तीन दिवसीय विशेष बैठक के पहले दिन लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक- 2026, परिमीमन विधेय-2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक-2026 पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने हमेशा महिलाओं के विकास और सशक्तीकरण के लिए काम किया है। सरकार के पास नीयत और नीति दोनों हैं और मोदी जैसे सशक्त नेतृत्व के कारण यह संभव हो रहा है। सितंबर 2023 में संसद ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित कर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया था। उस समय यह प्रावधान किया गया था कि आरक्षण 2026 के बाद जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा। आज पेश किए गए विधेयकों का उद्देश्य इसी आरक्षण को समय पर लागू करना है।
उन्होंने कहा कि लोकसभा की सदस्य संख्या 543 से बढ़ाकर 815 करने का प्रस्ताव है। इनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। किसी राज्य की मौजूदा ताकत कम नहीं होगी और पुरुष वर्ग को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। महिलाओं के लिए आरक्षण वर्तमान सीटों के अतिरिक्त होगा। अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं के लिए भी एक-तिहाई हिस्सा सुनिश्चित किया जाएगा।
मेघवाल ने संविधान सभा की चर्चाओं का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान की प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का उल्लेख है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की उज्ज्वला, जनधन, मुद्रा, सुकन्या समृद्धि, लखपति दीदी और मातृ वंदना योजनाओं का उदाहरण देते हुए कि सरकार महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई, अहिल्याबाई होलकर, सावित्रीबाई फुले, सरोजिनी नायडू और अरुणा आसफ अली जैसी ऐतिहासिक महिलाओं को याद करते हुए कहा कि जब भी महिलाओं को अवसर मिला, उन्होंने अपनी क्षमता सिद्ध की है।
मेघवाल ने कहा कि अनुच्छेद 81, 82, 170, 330 और 332 में संशोधन प्रस्तावित हैं। लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 815 और केंद्रशासित प्रदेशों से 35 सदस्य होंगे। साल 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाएगा ताकि नई जनगणना का इंतजार न करना पड़े और आरक्षण में देरी न हो। राज्य विधानसभाओं में भी समान व्यवस्था लागू होगी। उन्होंने कहा कि सभी दल दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इन विधेयकों का समर्थन करें ताकि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 2023 में इसे पास कर अब लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। ये विधेयक 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं को लोकसभा में एक-तिहाई प्रतिनिधित्व देंगे, जो भारतीय लोकतंत्र को नई दिशा देगा। आजादी के 75 वर्ष बाद अमृतकाल में प्रधानमंत्री मोदी ने नए संसद भवन में पहले बिल के रूप में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (Nari Shakti Vandan Adhiniyam) पारित करवाया था। आज उसी शृंखला में यह संशोधन बिल लाया गया है। महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने की चर्चा संविधान सभा में भी हुई थी।
उन्होंने सामाजिक न्याय के तहत शौचालय, पीएम आवास, उज्ज्वला योजना, मातृ वंदना योजना और मैटरनिटी लीव बढ़ाने जैसे कदमों का भी जिक्र किया। आर्थिक न्याय के तहत जनधन, मुद्रा, सुकन्या समृद्धि और लखपति दीदी जैसी योजनाओं से महिलाओं के सशक्तिकरण की बात कही। राजनीतिक न्याय के तहत बाबा साहब अंबेडकर द्वारा महिलाओं को सार्वभौमिक मताधिकार देने का उल्लेख किया। कई विकसित देशों में महिलाओं को मताधिकार मिलने में दशकों लगे, जबकि भारत ने आजादी के तुरंत बाद इसे सुनिश्चित किया।
मेघवाल ने स्वामी विवेकानंद के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि विश्व का कल्याण तभी संभव है जब महिलाओं की स्थिति सुधरे। दो पंखों से ही उड़ान भरी जा सकती है और मोदी जी का सपना है कि महिलाएं नीति निर्माण में भागीदार बनें। तमिल कवि सुभ्रमण्यम भारती की कविता का भी उल्लेख किया जिसमें स्वतंत्र, शिक्षित और आत्मनिर्भर नारी की कल्पना की गई है।


